फ़ितरी हक़ीक़त
Al-Risala, March 2023, pp. 56–59
By Maulana Wahiduddin Khan
सी एफ डोल (C. F. Dole) ने कहा है कि – मेहरबानी का बर्ताव दुनिया में सबसे बड़ी अमली ताकत है:
Goodwill is the mightiest force in the Universe. यह महज़ एक शख़्स का क़ौल नहीं, यह एक फ़ितरी हक़ीक़त है। इन्सान के पैदा करने वाले ने इन्सान को जिन ख़ुसूसियात और विशेषताओं के साथ पैदा किया है,
उठेंगा। वह शख़्स जो इससे पहले आपके ऊपर फूल बरसा रहा था, अब वह आपके ऊपर कांटे और आग बरसाने के लिए आमादा हो जाएगा। इसके बरअक्स एक शख़्स जिसको अपना दुश्मन समझते हैं, उससे मीठा बोलिए। उसकी कोई ज़रूरत पूरी कर दीजिए। उसकी किसी मुश्किल के वक़्त उसके काम आ जाइए, यहां तक की प्यास के वक़्त उसको एक गिलास ठंडा पानी पिला दीजिए। अचानक आप देखेंगे कि उसका पूरा मिज़ाज बदल गया है। जो शख़्स इससे पहले आपका दुश्मन दिखाई दे रहा था, वह आपका दोस्त और ख़ैरख़्वाह बन जाएगा। ख़ुदा ने इन्सान की फ़ितरत में एक मिज़ाज रख कर हमारी बहुत बड़ी मदद की है। इस फ़ितरत ने एक निहत्थे आदमी को भी सबसे बड़ा तसख़ीरी (सम्मोहक) और असरदार हथियार दे दिया है। इस दुनिया में शेर और भेड़िये को मारने के लिए गोली की ताक़त चाहिए, मगर इन्सान को जीतने के लिए गोली की ज़रूरत नहीं। उसके लिए अच्छे सुलूक की एक फुहार काफ़ी है। कितना आसान है इन्सान को अपने क़ाबू में लाना। मगर नादान लोग इस बेहद आसान काम को अपने लिए बेहद मुश्किल काम बना लेते हैं। परिवर्तन का नियम क़ायनाती पैटर्न का एक पहलू यह है कि यहां की पूरी व्यवस्था रूपांतरण व परिवर्तन (conversion) के नियम पर क़ायम है। यहां किसी चीज़ की उपयोगिता इसी में है कि वह परिवर्तन के सिद्धांत पर पूरी उतरे। मसलन, इस दुनिया में इंसान की सांस से तथा अन्य कारणों से बड़ी मात्रा में कार्बन
ज़हरीली गैस लेकर उन्हें लाभदायक गैस का तोहफ़ा पेश करती है। इसी तरह गाय की मिसाल लीजिए। गाय एक तरह से कुदरत की इंडस्ट्री है, जो घास खाती है और उसको दूध के रूप में हमें लौटा देती है। वह इंसान के न खाने योग्य चीज़ को खाने योग्य चीज़ में बदलने का कुदरती कारख़ाना है। गाय अगर ऐसा करे कि वह घास खाकर घास ही देने लगे तो वह अपनी क़ीमत और उपयोगिता खो देगी। कनवर्ज़न (रुपांतरण) का यह नियम जो बाक़ी दुनिया में लागू है, वही इंसान के लिए भी आदर्श है। बांकी दुनिया की सही कार्यकुशलता का रहस्य यह है कि वह कनवर्ज़न के सिद्धान्त पर काम कर रही हो। इसी प्रकार बेहतर जिंदगी और सफल मानव समाज बनाने का गुण भी यही है कि इसके व्यक्ति ऐसा चरित्र प्रस्तुत करें कि वे ‘घास’ खाएं और उसको ‘दूध’ के रूप में दुनिया की तरफ़ लौटा सकें। क़ुरान में सच्चे इंसानों के बारे में कहा गया है कि जब उन्हें गुस्सा आता है तो वे माफ़ कर देते हैं यानि दूसरों की तरफ़ से उन्हें ऐसा सलूक मिलता है जो उनमें गुस्सा और बदले की आग भड़काने वाला हो पर वे गुस्सा और बदले की आग को अपने अन्दर ही अन्दर बुझा देते हैं। और दूसरे व्यक्ति को जो चीज़ लौटाते हैं वह क्षमा होती है और सद्व्यवहार होता है। कुरान में कहा गया है कि भलाई और बुराई दोनों समान नहीं। तुम जवाब में वह कहो जो उससे बेहतर हो। फ़िर तुम देखोगे कि तुममें और जिसमें दुश्मनी थी, वह ऐसा हो गया जैसे कि कोई क़रीबी दोस्त (41:34)। इस आयत के बारे में हज़रत अली इब्ने अबी तालिब ने कहाः
आदमी का खुदा-परस्त उसक अन्दर ऐसी खूबी पैदा कर देता है कि वह बुराई को भलाई में बदल (रूपान्तरित कर) सके जो लोग उसे गाली दें उनके लिए वह दुआ करे। जो लोग उनके साथ ग़ैर इंसानी सलूक करें उनके साथ वह इंसानी सलूक करे। जो लोग उससे कड़वा बोलें उनका स्वागत वह मीठे बोल से करे। इससे मालूम होता है कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए हमारी कोशिशों का रुख़ क्या होना चाहिए। वह यह होना चाहिए कि हम व्यक्तियों में 'कनवर्न' की खूबी पैदा करने की कोशिश करें। मौजूदा दुनिया में आदर्श समाज इसी कनवज़र्न के जरिए बनाया जा सकता है। इसके सिवा आदर्श समाज बनाने का कोई और तरीका नहीं।