اسمارٹ اسپیکر
Al-Risala, May 2023, pp. 50–2
By Maulana Wahiduddin Khan
جدید انفارمیشن ٹکنالوجی نے قرآن کے پیغام کو عام کرنے کے لیے نہایت وسیع میدان کھول ان میں نہایت اہم اور مشہور ٹکنالوجی وہ ہے جسے اسمارٹ اسپیکر کہا جاتا ہے۔ Smart Speaker, an internet-enabled speaker that is controlled by spoken commands and is capable of streaming audio content, relaying information, and communicating with other devices. اسمارٹ اسپیکر انسانی آواز کی بنیاد پر کام انجام دینے والا ڈیوائس ہے۔ اس کے ذریعے آپ بول کر انٹرنیٹ کے متعدد کام انجام دے سکتے ہیں۔ جیسے کسی سوال کا جواب معلوم کرنا، الارم اور یاد دہانی کا عمل، آڈیو یا ویڈیو یا کتابیں سننا، وغیرہ۔ ایک سروے کے مطابق 2022 میں امریکہ بھر میں 94 ملین اسمارٹ اسپیکر استعمال اس وقت تین کمپنیوں کے اسمارٹ اسپیکرز عام ہیں: ایمی زون الیکسا، ایپل ہوم پاڈ اور گوگل اسسٹنٹ۔ اب آپ اپنے اسمارٹ اسپیکر کے ذریعہ ترجمہ قرآن بھی سن سکتے ہیں۔ اللہ کے فضل و کرم سے سی پی ایس ٹیم نے اس عظیم موقع کو دعوت کے لیے استعمال کیا ہے۔ یعنی ایمیزون الیکسا اور گوگل اسسٹنٹ کے ذریعے مولانا وحید الدین خاں صاحب کا انگریزی ترجمہ قرآن پیش کیا ہے۔ یہ پروجیکٹ ممبئی اور امریکہ کی سی پی ایس ٹیموں کی باہمی کوشش کا نتیجہ ہے۔ اسمارٹ اسپیکر کے استعمال کا طریقہ معلوم کرنے کے لیے نیچے موجود یوٹیوب کیو آر کوڈ کو اسکین کریں۔ اس کے علاوہ اگر آپ اپنے گوگل اسسٹنٹ کو" وزڈم آف دی ڈے" (wisdom of the day) کہیں گے تو مولانا وحید الدین خاں صاحب کی انگریزی کتاب قرآن ک وزڈم کے ایک مضمون کا آڈیو اسٹارٹ ہو جائے گا۔ ایمیزون الیکسا (Amazon Alexa) اور گوگل اسسٹنٹ پر قرآن کا آڈیو سننے کے لیے درج ذیل لنک استعمال کریں:
(مولانا فرہاد احمد)
इन्सान भी अपनी ला क्रायनात (सृष्टि) निवावाद (सहज) रूप से विभिन्न और परस्पर विरोधी तत्वों का संकलन है। इसमें आग भी है और पानी भी। इसमें नाज़ुक पौधे भी हैं और सख़्त पत्थर भी। इसमें दिन की रोशनी भी है और रात का अंधेरा भी। लेकिन इन तमाम विरोधाभासों के बावजूद पूरी क्रायनात एक सुव्यवस्थित इकाई की तरह काम करती है। जैसे यह एक ईश्वरीय माडल है। इन्सान को चाहिए कि वह भी इसी माडल को अपने लिए मार्गदर्शक बना ले। कुरआन के अध्ययन से पता चलता है कि इन्सान और बाक़ी क्रायनात दोनों एक ही इकाई के दो हिस्से हैं। दोनों में जो फ़र्क़ है वह यह है कि इन्सान अपना निजी विवेक और निजी इरादा रखता है। जबकि क्रायनात की अन्य चीजें निजी विवेक (शऊर) और निजी इरादा नहीं रखतीं। जड़ पदार्थ प्राकृतिक नियम (law of nature) से कंट्रोल होते हैं और जीवित चीजें अपने अन्दर छुपी हुई प्रेरणा या सहज-बोध (Instinct) से। कुरआन के अनुसार, क्रायनात का जो धर्म (कार्य पद्धति या निज़ामें-अमल) है, वही इन्सान का धर्म (दीन) भी है। दोनों की कामयाबी का रहस्य एक ही प्राकृतिक नक्शे (समीकरण) में छुपा हुआ है। कुरआन में कहा गया है: “क्या वे अल्लाह के दीन के सिवा कोई और दीन चाहते हैं, हालांकि उसी के वश में है वह सब कुछ जो ज़मीन और आसमान में है, ख़ुशी से या नाख़ुशी से।” कुरआन में दूसरी जगह कहा गया है: “ज़मीन में फ़साद न करो उसकी दुरुस्ती (या संशुद्धि) के बाद।” इससे पता चलता है कि जिस ज़मीन पर इन्सानों को बसाया गया
यह सटीक और दुरुस्त नक़्श में बिगाड़ पैदा करने वाला बात होगा। इसका एक शब्द में 'क़ायनाती पैटर्न' कहा जा सकता है। जो क़ायनाती पैटर्न (ढांचा) कायनात को सफलता के साथ चला रहा है, वही इन्सान के लिए भी हितकर है।