Al-Risala · November 2024

अल्लाह की याद तमाम आमाल का ख़ूलासा है

Al-Risala, November 2024, pp. 15–16

By Maulana Wahiduddin Khan

हज़रत अबूदर्दार्' से روایت है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः क्या मैं तुमको न बताऊं कि कौन सा अमल (कर्म) सबसे बेहतर है, और तुम्हारे आक़ा के नज़दीक सबसे पाकीज़ा (पवित्र) है और तुम्हारे दर्जे को बढ़ाने वाला है और तुम्हारे लिए सोने-चांदी के इन्फ़ाक़ (बहुलता, प्रचुरता) से बेहतर है और तुम्हारे लिए इससे बेहतर है कि तुम अपने दुश्मन से मुठभेड करो और तुम उनकी गर्दनें मारो और वे तुम्हारी गर्दनें मारें? सहाबा ने कहा, हां ऐ खुदा के रसूल। आपने फ़रमायाः

बाप के हवाले से बताते हैं कि उमर बिन ख़त्ताब रज़ी अल्लाहह अनुहु न अपन असहाब से कहा: तुम लोग अपनी तमन्नाएं बताओ। किसी ने कहा कि मेरी तमन्ना यह है कि मेरा घर दिरहम से भरा होता तो मैं उसको अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करता। किसी ने कहा: मेरे पास इस घर के बराबर सोना होता तो मैं उसको अल्लाह के रास्ते में दे देता। किसी ने कहा मेरी तमन्ना है कि यह घर मोतियों से भरा होता और मैं उसको अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करता। वग़ैरह उमर रज़ीअल्लाहु अनुहु ने फ़रमाया: लेकिन मेरी तमन्ना तो यह है कि इस घर भर मेरे पास अबू उबैदा बिन अल-जर्राह, मुआज़ बिन जबल और हुज़ैफ़ा बिन यमान जैसे लोग होते और उनको मैं अल्लाह के कामों में इस्तेमाल करता। (अल-तारीख़ अल-सग़ीर, भाग 1, पेज 54)

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