Al-Risala · May 2025

मेहमान-नवाज़ी या दिखावा

Al-Risala, May 2025, pp. 13–14

By Maulana Wahiduddin Khan

आजकल यह आम प्रचलन है कि लोग अपने मेहमानों के खाने-पीने का बहुत ज़्यादा इंतज़ाम करते हैं और इस पर काफी पैसा खर्च करते हैं। अगर उनसे कहा जाए कि यह फ़िज़ूलखर्ची और संसाधनों को व्यर्थ करना है, तो वे कहते हैं कि

मुहम्मद (स.अ.व.) ने फ़रमाया, "जो इश्वर पर और आख़िरत के दिन पर विश्वास रखता हो, उसे चाहिए कि अपने मेहमान का इकराम करे।" मगर इकराम का अर्थ हरगिज़ तकल्लुफ़ (दिखावा) नहीं। यह एक मानवीय और नैतिक कार्य है, न कि कोई दिखावे की चीज़। मेहमान के लिए तकल्लुफ़ से बचने की सख़्त हिदायत दी गई है। हज़रत सलमान (रज़ि.) ने बताया, "पैग़म्बर मुहम्मद (स.अ.व.) ने हमें मेहमान के लिए तकल्लुफ़ करने से मना किया।" (शु'ब-उल-ईमान 9155) इसी तरह, एक हदीस में पैग़म्बर मुहम्मद (स.अ.व.) ने फ़रमाया, "मैं और मेरी उम्मत के परहेज़गार लोग तकल्लुफ़ से बहुत दूर रहते हैं।" (अल-मकासिदुल हसनः, 191) वास्तव में, मेहमान की खातिरदारी में जो तकल्लुफ़ किया जाता है, वह असल में मेज़बान के खुद के सम्मान का एक रूप होता है, न कि मेहमान का सम्मान। एक परहेज़गार व्यक्ति के लिए तकल्लुफ़ जैसी दिखावटी चीज़ का कोई महत्व नहीं होता।

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