स्वीकार करने की शर्त
Al-Risala, September 2025, pp. 52–55
By Maulana Wahiduddin Khan
किसी अच्छे कार्य की स्वीकृति की शर्त क्या है, इसे कुरआन की सूरह नंबर 5 में इन शब्दों में व्यक्त किया गया हैः إِنَّمَا يَتَقَبَّلُ اللَّهُ مِنَ الْمُتَّقِينَ
भावना का जागृत करा यही अल-रिसाला का वास्तविक उद्देश्य हो जिस व्यक्ति ने अल-रिसाला से यह मारिफ़त का आहार प्राप्त किया, वही वास्तव में अल-रिसाला को पढ़ने वाला है। और जिसने इससे यह आहार प्राप्त नहीं किया, उसने अल-रिसाला को पढ़ा ही नहीं। अल-रिसाला को केवल जानकारी के लिए पढ़ना, अल-रिसाला के साथ ज़ुल्म करने के समान है। ऐसा व्यक्ति न तो अल-रिसाला के साथ न्याय करता है और न ही स्वयं के साथ। हज़रत अली बिन अबी तालिब (निधन: 661 ईस्वी) इस्लामी इतिहास की एक महान शख़्सियत माने जाते हैं। बुद्धिमत्ता और ज्ञान की दृष्टि से उनका स्थान बहुत ऊँचा है। उनके कथनों और भाषणों को संकलित कर एक स्वतंत्र पुस्तक तैयार की गई है, जिसका नाम नहजुल बलाग़ा (Nahjul Balagha) है। हज़रत अली बिन अबी तालिब के कथनों में से एक प्रसिद्ध कथन यह है: "قيمة المرء ما يحسنه"
(अर्थ: मनुष्य का मूल्य उसकी ख़ास योग्यता में निहित है।) "The value of a person lies in excellence."
फिर मन पूछा कि आप अल-रिसाला के किसी अंक का कितना बार पढ़ते है? उन्होंने कहा कि एक बार। मैंने कहा कि जिस व्यक्ति ने अल-रिसाला को केवल एक बार पढ़ा, उसने अल- रिसाला को वास्तव में पढ़ा ही नहीं!
क्योंकि आप माहनामा अल-रिसाला को केवल एक बार पढ़ते हैं, इसलिए आप इसे अब तक समझ नहीं सके। आपने केवल अल-रिसाला की लाइनों (lines) को पाया है, लेकिन आपने अब तक इसके मायने (between the lines) को फिर मैंने कहा कि माहनामा अल-रिसाला कोई जानकारी देने वाली पत्रिका नहीं है, बल्कि मारिफ़त (आध्यात्मिक ज्ञान) की पत्रिका है। अल-रिसाला में जो जानकारी होती है, वह अपने आप में लक्ष्य नहीं होती, बल्कि उसका एक उच्च उद्देश्य होता है। यह उद्देश्य तवस्सुम (कुरान, 15:75) है - यानी जानकारी के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान (मारिफ़त) और अर्थपूर्ण सोच को विकसित करना। असल में, इस दुनिया में हमें दो प्रकार के खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती 1. भौतिक आहार (material dose) जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है। 2. मारिफ़त का आहार (spiritual dose) जो अल्लाह पर ईमान (आस्था) को सशक्त बनाता है।
होता है कि मरने वाला अभी युवा अवस्था में होता है, वह पूरी तरह स्वस्थ होता है और अपने कार्यों में व्यस्त रहता है, लेकिन अचानक उसकी मृत्यु हो जाती है। आमतौर पर इसे असमय मृत्यु (untimely death) कहा जाता है, लेकिन वास्तव में यह असमय मृत्यु नहीं होती, बल्कि यह याद दिलाने वाली मृत्यु (reminder death) होती है। यह एक चेतावनी देने वाली मृत्यु होती है ताकि लोग इसे देखकर अपनी ज़िंदगी को सुधार लें और मृत्यु को जो घटना स्वाभाविक रूप से होती है, उसे लोग एक सामान्य घटना मानते हैं और उस पर विचार नहीं करते। लेकिन जो घटना असामान्य रूप से या अप्रत्याशित रूप से होती है, वह लोगों के लिए एक झटका साबित होती है। ऐसी घटनाएँ लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। इस प्रकार की मृत्यु एक चेतावनी की तरह होती है, जैसे किसी को जगाने के लिए बजने वाली अलार्म घड़ी। यह पुकारती है— "सोने वालो, जागो! ग़फ़लत (लापरवाही) का समय समाप्त हो चुका है!
आम मृत्यु एक मौन संदेश होती है, लेकिन इस प्रकार की मृत्यु बोलता हुआ संदेश होती है।