Al-Risala · March 2026

पहली ज़िंदगी, दूसरी ज़िंदगी

Al-Risala, March 2026, pp. 54–56

By Maulana Wahiduddin Khan

जब इंसान पैदा होकर इस मौजूदा दुनिया में आता है, तो यह उसकी पहली ज़िंदगी होती है। यहाँ उसकी मर्जी के बिना उसके लिए सब कुछ उपलब्ध होता है। जैसे ही वह जन्म लेता है, उसे एक प्यार भरा परिवार मिल जाता है, और उसे एक ऐसी दुनिया प्राप्त होती है जो उसके लिए अत्यंत अनुकूल होती है। उसे एक पूर्ण जीवन प्रणाली (life support system) प्राप्त हो जाती है, जिसके बिना उसकी ज़िंदगी

और इसका बेहतर तक़ाज़ के लिए।" इसके बाद हुक्म दिया कि ज़ैद बिन सअना की तयशुदा मात्रा में खजूरें दे दी जाएं। इसके अलावा उन्हें 20 साअ खजूरें और ज़्यादा दी जाएं। ज़ैद बिन सअना आपके इस अच्छे से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस्लाम अपना लिया। (अल-मोजम अल-कबीर, हदीस संख्या 371)

पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल०) उस समय अरब के शासक थे वह ज़ैद बिन सअना के ख़िलाफ़ कोई भी सख़्त कार्रवाई करने का पूरा इख़्तियार रखते थे। इसके बावजूद आपने ज़ैद बिन सअना की गुस्ताख़ी और बदसलूकी को एकतरफ़ा तौर पर बर्दाश्त किया। उसकी उत्तेजना के जवाब में आप उत्तेजित नहीं हुए, आप पूरी तरह शांत रहे। यह एक ऐतिहासिक और आदर्श मिसाल है, जो अपने आप में सम्पूर्ण है, और जो बताती है कि आदर्श इन्सानी कैसा होना चाहिए, और यह कैसे संभव है कि सामाजिक ज़िन्दगी में एक शख्स सब्र और बर्दाश्त, धैर्य और सहनशीलता के साथ कैसे ज़िन्दगी गुज़ारे। हलाल को हराम बनाना रोजी कमाना हर व्यक्ति की आवश्यकता है। लोग विभिन्न कार्य करके अपनी आजीविका अर्जित करते हैं - जैसे कि सेवा, व्यापार, कृषि आदि। ये सभी तरीक़े वैध (जायज़) तरीक़े हैं, और व्यक्ति का यह अधिकार है कि वह इन स्रोतों में से किसी भी माध्यम को चुन सकता है।

कोशिशों का लगातार जारी रखा वह हर असफलता का अस्थायी मान और भावष्य के प्रति अपनी आशा को कभी समाप्त न होने दे। वह बीती बातों में उलझने के बजाय आगे की दिशा में बढ़ता रहे। भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचे और यथार्थ पर आधारित योजनाओं को अपनाए। जीवन में यह हमेशा आवश्यक होता है कि व्यक्ति अपने अनुभवों के आधार पर अपने मामले का नए सिरे से आकलन करे और नई सोच के साथ आगे की योजना बनाए। यही बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का एकमात्र प्रभावी मार्ग है।

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