اختلاف ایک آزمائش
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۷
यदि कोई व्यक्ति इस सच्चाई पर विचार करे, तो वह भी उस अरब शेख की तरह कृतज्ञता के भाव से सजदे में गिर पड़े। लेकिन ऐसा नहीं होता। इसका कारण यह है कि इंसान दुनिया की चीजों को फॉर ग्रांटेड मान लेता है। वह जानबूझकर या अनजाने में यह समझता है कि जो कुछ है, वह होना ही चाहिए। जो कुछ उसे मिला हुआ है, वह उसे मिलना ही चाहिए। यही वह जगह है, जहां इंसान की परीक्षा है। इंसान को चाहिए कि वह इस मामले में अपनी चेतना को जागृत करे। बार- बार विचार करके इस सच्चाई को समझे कि वह सिर से पैर तक एक असहाय प्राणी है। उसे जो कुछ मिला है, वह पूरी तरह से ईश्वर की देन है। यदि ईश्वर न दे, तो उसे कुछ भी नहीं मिलेगा। जो चीजें इंसान को अपने आप मिलती हुई प्रतीत होती हैं, उन्हें वह इस तरह ले, जैसे वे हर समय सीधे ईश्वर की ओर से भेजी जा रही हों। वह मिली हुई चीजों को ईश्वर की देन के रूप में पहचानने की कोशिश करे। ईश्वर को वही इंसान प्रिय है, जो अपनी चेतना को इतना जागृत करे कि वह सामान्य रूप से मिलने वाली जीवन की चीजों को ईश्वर की असामान्य कृपा के रूप में देखे। वह सामान्य (Usual) को असामान्य (Unusual) के रूप में समझे। वह परोक्ष (अदृश्य) को प्रत्यक्ष के रूप में अनुभव करे। ऐसे ही लोग हैं, जिन्हें
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