सोहबत का असर
الرسالہ، مئی ۲۰۲۵، صفحہ ۸
दुनिया कर्म का दुनिया है, यहाँ कोई पुरस्कार नही हो| अगली दुनिया पुरस्कार की दुनिया होगी, जहाँ किसी के लिए कोई कर्म का अवसर नहीं होगा। यह हर महिला और पुरुष का भाग्य है, कोई भी व्यक्ति अपनी इस तकदीर को बदल नहीं सकता। वर्तमान दुनिया में रहते हुए हमें सबसे पहले यह जानना चाहिए कि सृजनकर्ता की योजना क्या है। सृजनकर्ता ने यह अद्भुत दुनिया क्यों बनाई और इस में असाधारण क्षमताओं वाले मनुष्य को क्यों बसाया। लोगों की वर्तमान अज्ञानता इस सृजनात्मक योजना को न जानने के कारण है। वे समझते हैं कि उनके सामने कोई और परिणाम आने वाला नहीं है। यदि व्यक्ति यह जान ले कि वह एक लंबे सफ़र पर है, उसे वर्तमान दुनिया से गुजर कर आखिरी दुनिया में प्रवेश करना है, तो उसके जीवन की पूरी रूपरेखा बदल जाएगी।
सोहबत का असर
शेख़ मुसलहुद्दीन सादी शिराज़ी (वफ़ात: 1291 ईस्वी) की मशहूर किताब "गुलिस्तां" में कहानी के अंदाज़ में नैतिक शिक्षा दी गई है। एक कहानी में वे बताते हैं कि वे एक बाग़ में गए। वहाँ उन्होंने देखा कि एक जगह मिट्टी से खुशबू आ रही है। उन्होंने मिट्टी से पूछा कि यह खुशबू तुम्हारे अंदर कहाँ से आई। मिट्टी ने जवाब दिया:
"देखो, यहाँ गुलाब का पेड़ उगा हुआ है। इसकी शाखाओं पर खुशबूदार फूल हैं। मैं इन फूलों के पास रहती हूँ, और इन खुशबूदार फूलों ने मुझे भी खुशबूदार बना दिया।"