सोहबत का असर
الرسالہ، مئی ۲۰۲۵، صفحہ ۱۰
"एक कठिनाई दो आसानियों पर हावी नहीं हो सकती। एक कठिनाई दो आसानियों पर हावी नहीं हो सकती।" (मुवत्ता इमाम मालिक, हदीस संख्या इस व्याख्या की और अधिक स्पष्टता हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास के एक कथन से होती है। उन्होंने कहा:
يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى: خَلَقْتُ عُسْرًا وَاحِدًا، وَخَلَقْتُ يُسْرَيْنِ، وَلَنْ يَغْلِبَ عُسْرٌ يُسْرَيْنِ "अल्लाह ने फरमाया कि मैंने एक कठिनाई पैदा की और दो आसानियाँ पैदा कीं। और एक कठिनाई दो आसानियों पर कभी हावी नहीं हो सकती।" (तफ्सीर अल-कुर्तुबी, जिल्द 20, पृष्ठ 107) यह कोई रहस्यमय बात नहीं, बल्कि एक ज्ञात वास्तविकता है जिसे मानव प्रकृति के अध्ययन से समझा जा सकता है। मनोविज्ञान के अनुसार, जब इंसान किसी कठिनाई का सामना करता है और हिम्मत नहीं हारता, तो उसके अंदर दोगुनी ताकत आ जाती है। एक ताकत वह जो सामान्य स्थिति में पहले से मौजूद थी, और दूसरी ताकत वह जो बढ़ी हुई प्रेरणा (incentive) की वजह से उसके अंदर आती है। इस प्रकार, कठिनाई आने पर इंसान अपने अंदर बढ़ी हुई प्रेरणा के कारण अधिक दृढ़ता और हिम्मत के साथ कठिनाई का सामना करने में सक्षम हो जाता है। इंसान को चाहिए कि वह मानव प्रकृति के इस रहस्य को समझे और कठिनाई