आसान विकल्प का चयन—एक सुन्नत
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۵، صفحہ ۴
यह एक ज्ञात बात है कि हर सिद्धांत का एक व्यावहारिक अनुप्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, अध्यात्म के व्यावहारिक अनुप्रयोग को अप्लाइड स्पिरिचुएलिटी (Applied Spirituality) कहा जाता है। इसी तरह, विज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग को अप्लाइड साइंस (Applied Science) कहा जाता है। इसी तरह, हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) द्वारा वर्णित सिद्धांत का भी एक अप्लाइड प्रिंसिपल (Applied Principle) है। लेकिन इस अप्लाइड प्रिंसिपल की मिसालें किसी भी हदीस के व्याख्याकार के यहां नहीं मिलतीं। मेरे ज्ञान के अनुसार, इस्लाम के पूरे इतिहास में किसी भी आलिम या लेखक ने हज़रत आयशा द्वारा वर्णित इस सिद्धांत के व्यावहारिक अनुप्रयोग को विस्तार और स्पष्टता के साथ बयान नहीं किया। इस्लामी साहित्य का यह अभाव निस्संदेह एक बड़ा नुकसान है। हम जानते हैं कि क़ुरआन में नमाज़ के बारे में यह आदेश दिया गया है: “नमाज़ क़ायम करो।” (2:43)। यह नमाज़ के बारे में एक सिद्धांत है। इसके बाद यह सवाल था कि इस सिद्धांत का व्यावहारिक अनुप्रयोग क्या है। उलमा ने हदीसों का अध्ययन करके नमाज़ की व्यावहारिक विधि यानी अप्लाइड सलाह (Applied Advice) पर कई पुस्तकें लिखीं। इसका परिणाम यह हुआ कि उम्मत को निःसंदेश पता चल गया कि नमाज़ का व्यावहारिक स्वरूप क्या है। अगर ऐसा न हुआ होता, तो लोग नमाज़ के आदेश को तो जानते, लेकिन उसकी व्यावहारिक विधि से अनजान होने की वजह से वे नियमित रूप से नमाज़ अदा करने से वंचित रह जाते।
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