Al-Risala · September 2025 · page 51

مٹھاس کا اضافہ

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۵، صفحہ ۵۱

कुरआन में इस लागा का छांव इन शब्दा म प्रस्तुत का गई ह:

اَلَّذِیۡنَ یُؤۡتُوۡنَ مَاۤ اٰتَوۡا وَّ قُلُوۡبُہُمۡ وَجِلَۃٌ اَنَّہُمۡ اِلٰی رَبِّہِمۡ رَاجِعُوۡنَ "वे लोग जो देते हैं, और उनका दिल कांपता है, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें अपने रब की ओर लौटना है।" (मुमिनून जो व्यक्ति इस अर्थ में परहेज़गार होता है, उसका हाल यह होगा कि जब वो कोई अच्छा कर्म करेगा तो उसे गर्व महसूस नहीं होगा। वो अच्छे से अच्छा कर्म करेगा फिर भी वह उसे बहुत छोटा कर्म समझेगा और उसे अपर्याप्त मानेगा। वह अपने कर्म को इतना तुच्छ समझेगा कि अगर अल्लाह उसे स्वीकार कर लेता है, तो यह अल्लाह की कृपा है। उसकी सोच यह होगी कि यह मामला यहीं समाप्त नहीं होता, बल्कि उसकी अंतिम उपस्थिति अल्लाह के पास होगी। अल्लाह ही है जो अगर उसके कार्य को मूल्यवान मानते हैं तो उसका कार्य मूल्यवान है, अन्यथा उसका कार्य कोई महत्व नहीं रखता। ऐसे व्यक्ति का हाल यह होता है कि एक ओर वह अच्छा कार्य कर रहा होता है, और दूसरी ओर, उसकी आँखों से विनम्रता के आँसू बह रहे होते हैं। सच्चाई यह है कि यही विनम्रता का अहसास किसी कार्य को स्वीकार्य बनाता है। जिस कार्य में विनम्रता की भावना नहीं होती, वह कार्य कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता। अल्लाह की दृष्टि में मात्रा का महत्व नहीं है, बल्कि गुणवत्ता का महत्व है। अल्लाह किसी व्यक्ति के कार्य को उसकी बाहरी स्थिति के आधार पर नहीं

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