एकता की मिसाल
الرسالہ، نومبر ۲۰۲۵، صفحہ ۱
ख़याल रखना पड़ता है। जानवरों में बचाव के जो तराक़ पाए जात ह व इन्सान के लिए भी बहुत अहमियत रखते हैं, क्योंकि जानवरों का तरीक़ा दर-असल कुदरत का तरीक़ा है। जानवर जो कुछ करते हैं अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति (natural instincts) के तहत करते हैं। दूसरे शब्दों में वे सीधे कुदरत के सिखाए हुए हैं। जानवर सृष्टि की पाठशाला में सीखे हुए विद्यार्थी हैं। उनका अमल या कर्म कुदरत का बताया हुआ सबक है। उनके काम करने के ढंग को, पैदा करने वाले की पुष्टि हासिल है। इस सिलसिले में कुछ मिसालें पेश हैं: 1. हाथी और शेर जंगल के दो सब से बड़े जानवर हैं। अगर दोनों में टकराव हो जाए तो यह टकराव दोनों के लिए ख़तरनाक और प्राणघातक होता है। हाथी और शेर दोनों इस सच्चाई से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं। इसलिए वे हमेशा यह कोशिश करते हैं कि एक-दूसरे से कतरा कर निकल जाएं। बहुत ही कम ऐसा होता है कि दोनों यह नौबत आने दें कि उनके बीच सीधे जंग शुरू हो जाए। दो ऐसे दुश्मनों की जंग, जिनमें दोनों में से कोई दूसरे को ख़त्म करने की ताक़त न रखता हो हमेशा दोतरफ़ा तबाही पर ख़त्म होती है। शेर और हाथी अपनी पूरी ज़िन्दगी में इस टकराव से बचते रहते हैं। 2. यही मामला सांड का है। दो सांड (भंसे या बैल) अगर एक दूसरे से लड़ जाएं तो ऐसा बहुत कम मुमकिन है कि एक-दूसरे को ख़त्म कर दें। सांड ऐसे बेफ़ायदा टकराव से बचने के लिए यह तरकीब करते हैं कि अपनी-अपनी
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