Al-Risala · March 2025 · page 16

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۱۶

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۱۶

सिखा दें। इसके बाद एक रोज़ एक लड़का रोता हुआ अपनी माँ के पास आया। माँ ने पूछा कि तुम्हारा हाल क्या है? उसने कहा कि मेरे मुअल्लिम (शिक्षक) ने मुझे मारा है। (मुसनद अहमद, हदीस संख्या 2216)

ये क़ैदी सब के सब इस्लाम के प्रतिद्वंदी थे। उनको छोड़ने में यह अन्देशा था कि वे दोबारा इस्लाम के ख़िलाफ़ मसला बनेंगे। इसके बावजूद उन्हें तालीम की क़ीमत पर छोड़ दिया गया। इससे मालूम हुआ कि तालीम की अहम्मियत इस्लाम में इतनी ज़्यादा है कि हर अन्देशे को अनदेखा करके इसे हासिल करना चाहिए। द्वेष आदमी के दीन को खा जाता है नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, “बुग़्ज़ (द्वेष) मूंडने वाली चीज़ है। मैं यह नहीं कहता कि वह बाल को मूंडता है, किन्तु वह दीन को मूंडता है। उस ज़ात की क़सम जिसके क़ब्ज़े में मुहम्मद की जान है, तुम जन्नत में नहीं दाख़िल हो सकते जब तक कि मोमिन न बनो और मोमिन बन नहीं सकते जब तक आपस में मुहब्बत न करो।” (सुनन अल-तिर्मिज़ी, हदीस संख्या 2509)

ईमानदारी के साथ साझेदारी करने वालों का साथी ख़ुदा होता है रसूलुल्लाह (स.अ.व.) ने फ़रमाया, “अल्लाह फ़रमाता है कि जब दो आदमी मिल कर काम करते हैं तो मैं उन दो का तीसरा होता हूं, जब तक उन में से कोई बेईमानी

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