अर्थपूर्ण अपवाद
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۶، صفحہ ۵۳
एक जीवंत और संवेदनशील अस्तित्व रखता है, लेकिन पिछला दुनिया में प्राप्त सारा सुविधाएँ उससे छूट जाती हैं। फिर उसे इस बात की आवश्यकता होती है कि उसे सभी चीजें नवीनीकरण के साथ पुनः प्राप्त हों, ताकि वह सुरक्षा और शांति भरी जिंदगी बिता सके। इंसान को पहली जिंदगी का अनुभव इसलिए कराया जाता है ताकि उसके दिल से यह दुआ निकल पड़ेः “ऐ मेरे रब, जिस तरह तूने पहली जिंदगी में बिना किसी योग्यता के मेरी सारी जरूरतें पूरी कर दीं, उसी तरह दूसरी जिंदगी में भी तू अपनी रहमत से मुझे मेरी जरूरतों से बढ़कर अता फ़रमा।”
पहली जिंदगी में मैंने तेरी कृपाओं का प्रारंभिक स्वाद पाया था; अब दूसरी जिंदगी में तू उन्हें मेरे लिए पूर्ण और परिपूर्ण कर दे। पहली जिंदगी में तूने मुझे बिना किसी योग्यता या हक़ के जो कुछ भी दिया, वह सब तेरी ही दया थी—उसी तरह दूसरी जिंदगी में भी, मेरी अयोग्यता के बावजूद, तू मुझे सब कुछ अता कर दे। यदि पहली जिंदगी मेरे लिए तेरी बख्शिशों की शुरुआत थी, तो दूसरी जिंदगी में तू उन बख्शिशों की पूर्णता का प्रबंध कर दे।
अर्थपूर्ण अपवाद
ब्रह्मांड में अनगिनत विभिन्न चीजें पाई जाती हैं, लेकिन ब्रह्मांड का एक चमत्कारिक पहलू यह है कि इसमें आम तौर पर एकरूपता (uniformity) नहीं है, बल्कि हर हिस्से में अपवाद (exceptions) मौजूद हैं। ये अपवाद इस बात का प्रमाण हैं कि ब्रह्मांड का एक महान सृष्टिकर्ता है।
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