Al-Risala · March 2023 · page 56

फ़ितरी हक़ीक़त

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۵۶

साथकता का समझ नहीं पाते, जिसमें अपना मौजूदा हालत के तहत उन्हें अपना बख़िशश संदिग्ध दिखाई पड़ती हो। जिन लोगों ने ख़यालों की रंगीन दुनिया में अपने क़िले बना रखे हों वे किसी ऐसे पैगाम को अहमियत देने में नाकाम रहते हैं, जिसको मानने की हालत में उन्हें दिखाई दे कि वे किसी सुरक्षित क़िले में नहीं बल्कि रेगिस्तान में खड़े हुए हैं। जिन लोगों ने यह आस्था बना रखी हो कि किसी अमल के बग़ौर ही उनके लिए पहले से जन्नत के महल रिज़र्व हो चुके हैं। वे किसी ऐसी तहरीक में हिस्सा लेना ग़ैरज़रूरी समझते हैं जिसमें अमल की बुनियाद पर जन्नत में दाख़िले का राज़ बताया गया हो। सच को क़बूल करने में सबसे बड़ी रुकावट बिगड़ा हुआ मिज़ाज है। जो लोग बिगड़े हुए मिज़ाज वाले हों, उनको सिर्फ़ अपने मिज़ाज के मुताबिक़ बात ही अपील करती है। दूसरी कोई बात, चाहे वह कितनी ही दलीलों के साथ बयान कर दी जाए वह किसी तरह उन्हें अपील नहीं करती। अपने ख़ास मिज़ाज के ख़िलाफ़ किसी बात को मानना उनके लिए उतना ही कठिन हो जाता है, जितना कि बकरी के लिए गोश्त खाना और शेर के लिए घास चरना।

फ़ितरी हक़ीक़त

सी एफ डोल (C. F. Dole) ने कहा है कि – मेहरबानी का बर्ताव दुनिया में सबसे बड़ी अमली ताकत है:

Goodwill is the mightiest force in the Universe. यह महज़ एक शख़्स का क़ौल नहीं, यह एक फ़ितरी हक़ीक़त है। इन्सान के पैदा करने वाले ने इन्सान को जिन ख़ुसूसियात और विशेषताओं के साथ पैदा किया है,

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