फ़ितरी हक़ीक़त
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۵۸
ज़हरीली गैस लेकर उन्हें लाभदायक गैस का तोहफ़ा पेश करती है। इसी तरह गाय की मिसाल लीजिए। गाय एक तरह से कुदरत की इंडस्ट्री है, जो घास खाती है और उसको दूध के रूप में हमें लौटा देती है। वह इंसान के न खाने योग्य चीज़ को खाने योग्य चीज़ में बदलने का कुदरती कारख़ाना है। गाय अगर ऐसा करे कि वह घास खाकर घास ही देने लगे तो वह अपनी क़ीमत और उपयोगिता खो देगी। कनवर्ज़न (रुपांतरण) का यह नियम जो बाक़ी दुनिया में लागू है, वही इंसान के लिए भी आदर्श है। बांकी दुनिया की सही कार्यकुशलता का रहस्य यह है कि वह कनवर्ज़न के सिद्धान्त पर काम कर रही हो। इसी प्रकार बेहतर जिंदगी और सफल मानव समाज बनाने का गुण भी यही है कि इसके व्यक्ति ऐसा चरित्र प्रस्तुत करें कि वे ‘घास’ खाएं और उसको ‘दूध’ के रूप में दुनिया की तरफ़ लौटा सकें। क़ुरान में सच्चे इंसानों के बारे में कहा गया है कि जब उन्हें गुस्सा आता है तो वे माफ़ कर देते हैं यानि दूसरों की तरफ़ से उन्हें ऐसा सलूक मिलता है जो उनमें गुस्सा और बदले की आग भड़काने वाला हो पर वे गुस्सा और बदले की आग को अपने अन्दर ही अन्दर बुझा देते हैं। और दूसरे व्यक्ति को जो चीज़ लौटाते हैं वह क्षमा होती है और सद्व्यवहार होता है। कुरान में कहा गया है कि भलाई और बुराई दोनों समान नहीं। तुम जवाब में वह कहो जो उससे बेहतर हो। फ़िर तुम देखोगे कि तुममें और जिसमें दुश्मनी थी, वह ऐसा हो गया जैसे कि कोई क़रीबी दोस्त (41:34)। इस आयत के बारे में हज़रत अली इब्ने अबी तालिब ने कहाः
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