Al-Risala · March 2023 · page 59

कुदरत का फ़ैसला

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۵۹

आदमी का खुदा-परस्त उसक अन्दर ऐसी खूबी पैदा कर देता है कि वह बुराई को भलाई में बदल (रूपान्तरित कर) सके जो लोग उसे गाली दें उनके लिए वह दुआ करे। जो लोग उनके साथ ग़ैर इंसानी सलूक करें उनके साथ वह इंसानी सलूक करे। जो लोग उससे कड़वा बोलें उनका स्वागत वह मीठे बोल से करे। इससे मालूम होता है कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए हमारी कोशिशों का रुख़ क्या होना चाहिए। वह यह होना चाहिए कि हम व्यक्तियों में 'कनवर्न' की खूबी पैदा करने की कोशिश करें। मौजूदा दुनिया में आदर्श समाज इसी कनवज़र्न के जरिए बनाया जा सकता है। इसके सिवा आदर्श समाज बनाने का कोई और तरीका नहीं।

कुदरत का फ़ैसला

अगर आप अमरीका जाएं और वहां से कनाडा की तरफ़ सफ़र करें तो आप देखेंगे कि अमरीका और कनाडा की सरहद (border) पर दोनों मुल्कों के झंडे एक साथ लहरा रहे हैं। पास ही एक बोर्ड है, जिसके ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है- एक ही मां की औलादेंः Children of a common mother यह बात जो अमरीका और कनाडा की सीमा पर खुले बोर्ड के ऊपर लिखी गई है, यही बात तमाम दूसरे मुल्कों की सरहदों पर 'छुपे हुए बोर्डों' में न दिखाई देने वाले अक्षरों में लिखी हुई है। यह दूसरा बोर्ड वह है जो कुदरत की तरफ़ से लगाया गया है। पहला बोर्ड इंसानी हाथों ने लिखा है, दूसरा बोर्ड ख़ुद ख़ुदा के हाथों ने।

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