जन्नत, जहन्नम
الرسالہ، مئی ۲۰۲۳، صفحہ ۲
यह सटीक और दुरुस्त नक़्श में बिगाड़ पैदा करने वाला बात होगा। इसका एक शब्द में 'क़ायनाती पैटर्न' कहा जा सकता है। जो क़ायनाती पैटर्न (ढांचा) कायनात को सफलता के साथ चला रहा है, वही इन्सान के लिए भी हितकर है।
जन्नत, जहन्नम
हज़रत अबू हुदैरा कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः मैंने जहन्नम जैसी चीज़ नहीं देखी, जिससे भागने वाला सो गया हो। और मैंने जन्नत जैसी चीज़ नहीं देखी जिसका चाहने वाला सो गया हो (तिरमिज़ी)। आदमी को सबसे ज़्यादा जहन्नम से भागना चाहिए। मगर आदमी जहन्नम के मसले को बिल्कुल भूला हुआ है। आदमी को सबसे ज़्यादा जन्नत का चाहने वाला बनना चाहिए, लेकिन उसके अन्दर जन्नत को हासिल करने का कोई शौक़ नहीं। इन्हीं दो शब्दों में सारे इन्सानों की कहानी है। इन्सानों का यह हाल कैसा अजीब है। लोगों में जहन्नम का कोई अन्देशा नहीं और जन्नत की कोई चाह नहीं। ऐसी हालत में यह कैसे हो सकता है कि वे जहन्नम की आग से निजात पाएं और उनके लिए जन्नत की नेमतों के दरवाज़े खोले जाएं। लोगों के अन्देशे किसी और चीज़ के लिए हैं। उनके जज़्बात किसी और बात पर भड़कते हैं। उनके छुपे हुए ख़ौफ़ और उम्मीद के जज़्बात किसी और चीज़ के लिए हैं। ऐसी हालत में यह कैसे हो सकता है कि वे ख़ुदा की रहमतों के योग्य ठहराए जाएं। दुनिया के मसले को लोगों ने अपना मसला बना रखा है। आख़िरत के मसले को