ख़ुदा का सबूत
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۳، صفحہ ۴
हो जाए वह ख़ामोश ज़्यादा दिखाई देगा और बालता हुआ कम। पत्थर खिसक गया बनी इसराईल के इतिहास की एक घटना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबियों को सुनाई। सुनने वालों में अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि अल्लाहू अन्हु भी थे। वह इस घटना को इस तरह बताते हैं :
तुम से पहले जो लोग गुज़रे हैं उनमें से तीन आदमी एक सफ़र पर निकले। चलते-चलते रात हो गई तो रात बिताने के लिए वे एक गुफ़ा में रुके। पहाड़ों पर अक्सर पत्थर गिरने (land slide) की घटनाएं होती रहती हैं। रात के वक़्त ऊपर से एक बड़ा सा पत्थर लुढ़क कर गिरा और इसकी वजह से गुफ़ा का मुंह बन्द हो गया। उन्होंने कहा कि इस चट्टान को हटाने का हमारे पास कोई उपाय नहीं है, सिवा इसके के हम अपने नेक कामों का हवाला देकर अल्लाह से दुआ करें। अब एक आदमी दुआ करने बैठा। उसने कहा, "ऐ ख़ुदा, मेरे मां-बाप बहुत बूढ़े हो चुके थे। मेरा नियम था कि रोज़ाना शाम को जब मैं अपने जानवर चरा कर लौटता तो जब तक मैं उन दोनों को दूध न पिला लेता न ख़ुद दूध पीता और न किसी और को पिलाता। एक दिन मैं चारे की तलाश में दूर निकल गया। शाम को वापसी में इतनी देर हुई कि मेरे मां-बाप सो गए। मैंने उन दोनों के लिए दूध निकालकर तैयार किया। जब उनके पास दूध लेकर पहुंचा तो दोनों को सोया हुआ पाया। मुझे यह अच्छा न लगा कि मैं उनको जगाऊं और मुझको यह भी गवारा न था कि मैं उनसे पहले दूध पिऊं और अपने बच्चों को पिलाऊं। मैं उनके पास खड़ा हो गया। मेरे हाथ
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