Al-Risala · July 2023 · page 10

ख़ुदा का सबूत

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۳، صفحہ ۱۰

साहब ह जा। एक देहात में दवा इलाज का काम करत हो। उनके पास काई सनद या डिग्री नहीं है, न वह पढ़े लिखे आदमी हैं। बस लोगों की सोहबत और तजुर्बा की वजह से कुछ बातें जान गए हैं। और उसके मुताबिक काम कर रहे हैं, बल्कि अपनी मेहनत और लगन की वजह से अपने इलाके में मशहूर हो गए हैं। उनके घर पर कुछ खेती बाड़ी का काम होता है। एक बार उन्होंने कहा कि मैं खेती के मोटे काम मसलन खोदना, हल चलाना वग़ैरह अपने हाथ से नहीं करता। आप समझेंगे कि वह शायद कोई शेरवानीपोश आदमी होंगे। और अपनी शेरवानी की इज़्ज़त रखने के लिए ऐसे कामों से बचते होंगे। मगर उनको 'शेरवानी' और 'पतलून' की ज़िन्दगी से कोई दिलचस्पी नहीं। वह बिलकुल सीधे-सादे देहाती हकीम है। खेती के सख़्त कामों से अलग रहने की वजह उन्होंने यह बताई कि अगर मैं इस तरह के काम करूं तो मेरा हाथ सख़्त हो जाएगा। उंगलियों की खाल मोटी हो जाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि मरीज की नब्ज़ मैं ठीक तरह से देख न सकूंगा। नब्ज़ की धड़कनें बहुत हल्की होती हैं और उनमें बहुत नाजुक फ़र्क होते हैं। उनको महसूस करने के लिए उंगलियों का नर्म होना बहुत ज़रूरी है। अगर उंगलियां हल और कुदाल पकड़ते-पकड़ते सख़्त हो जाएं, जैसा कि इस तरह का काम करने वालों की होती हैं, तो वे नब्ज़ की धड़कनें महसूस करने के क़ाबिल नहीं रहेंगी। हर मक़सद अपने इख़्तियार करने वाले से इसी का तक़ाज़ा करता है। जो शख़्स भी किसी मक़सद को अपनाए, ज़रूरी है कि वह अपनी अमली ज़िन्दगी और अपनी रोज़ाना की सरगर्मियों का अपने मक़सद के साथ तालमेल रखे, वह दोनों में कोई

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