Al-Risala · July 2023 · page 9

ख़ुदा का सबूत

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۳، صفحہ ۹

करक या जिसका मरम्मत करक व कुछ पस हासिल कर सकत हो। जैसे इन्सान उनकी नज़र में सिर्फ़ एक 'जूता' है और बस। इसी तरह बामक़सद आदमी अपने मक़सद में गुम रहता है। उसको हर चीज़ में सिर्फ़ अपना मक़सद नज़र आता है। वह हर घटना को, हर मसले को, हर बात को अपने मक़सद की रोशनी में देखता है। यहां तक कि वह अपने मक़सद के खयालों में इतना खो जाता है कि दूसरी चीज़ें उसे भूलने लगती हैं। एक साहब हैं जो बहुत सक्रिय, आदमी हैं जो काम भी करते हैं, उसको पूरी तरह लग कर करते हैं। एक बार मैं एक ऐसे ज़माने में उनसे मिलने गया जब वह अपना नया मकान बनवाने में लगे हुए थे। मैंने देखा कि उनके पायजामे में एक जगह बहुत से लाल- लाल धब्बे पड़े हुए है। पूछा यह क्या है। उन्होंने देख कर कहा, मुझे खुद भी नहीं मालूम। इसके बाद उन्होंने पायजामा उठाया तो मालूम हुआ किसी सख़्त चीज़ से टकराने की वजह से टांग में एक जगह चोट लग गई है। चोट लग कर खून बहा, कपड़े में लगा, फिर अपने आप सूख कर बंद हो गया और उन्हें बिल्कुल पता नहीं चला। जब आदमी के सामने कोई मक़सद हो तो वह इसी तरह उसमें खो जाता है, उस वक़्त वह एक और ही दुनिया में पहुंच जाता है, जहाँ दूसरी चीज़ें उसका साथ छोड़ देती हैं, जहाँ दूसरी चीजें उसे महसूस नहीं होतीं। यहां तक कि खुद अपने जिस्मानी तक़ाज़े भी उसे याद नहीं रहते। यह वह बात है, जिसको मैंने 'इरतिकाज़' कहा है। बामक़सद आदमी वही है जो

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