Al-Risala · July 2023 · page 16

ख़ुदा का सबूत

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۳، صفحہ ۱۶

लाज़िमा तौर पर प्रकृति और जगत का ऐसा ही होना चाहिए कि हम एस बन सक। इसलिए हर ख़राबी का कारण अपने अन्दर ढूंढिए, क्योंकि आपके बाहर हक़ीक़त में कोई चीज़ ही नहीं है, जहां ये कारण पाए जा रहे हों। (आजमगढ़ के एक इजतिमा में की गई तक़रीर 1963)

कलिम-ए-इस्लाम की हक़ीक़त इख़्लास और तक़वा है हज़रत उस्मान बिन अफ्फान कहते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना कि मैं एक ऐसा कलिमा जानता हूं कि जो बन्दा भी इसको अपने दिल से कहे वह आग पर हराम हो जाएगा। हज़रत उमर फ़ारूक़ ने कहा कि मैं तुमको बताऊं कि वह कलिमा क्या है? वह 'इख़्लास' का कलिमा है, जिसको अल्लाह तआला ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आपके असहाब पर लाज़िम किया था। वह तक़वा का कलिमा है, जिसकी तल्क़ीन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने चाचा अबू तालिब को मौत के वक़्त की की थी। वह इस बात की गवाही देना है कि अल्लाह के सिवा कोई मा'बूद नहीं। मेहनत की कमाई सबसे बेहतर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से किसी ने पूछा, “ऐ ख़ुदा के रसूल, सबसे बेहतर कमाई कौन-सी है? आपने जवाब दिया, “हाथ की कमाई”।

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