एक आज़माइश
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۳، صفحہ ۲
सकता है जब वह भविष्यवाणी के योग्य चरित्र वाला बन जाए।
एक आज़माइश
कुरआन में बताया गया है कि अल्लाह ने किसी के सीने में दो दिल नहीं बनाए। (अल-अहज़ाब 4) इससे इन्सान की एक पैदाइशी कमज़ोरी मालूम होती है। वह कमज़ोरी यह है कि इन्सान एक वक़्त में दो चीज़ों पर ध्यान नहीं दे सकता। आदमी सिर्फ़ एक चीज़ को अपने ध्यान का केन्द्र बना सकता है। जब भी वह एक चीज़ पर फोकस ध्यान केन्द्र) करेगा तो दूसरी चीजें निश्चित रूप से उसके फोकस से बाहर (out of focus) हो जाएंगी। इन्सान का यह गुण इन्सान के लिए एक बेहद नाजुक आज़माइश है। अपने हालात या अपनी रूचि के लिहाज से वह एक चीज़ को अपनाता है। ‘एक दिल' वाले स्वभाव की वजह से उसे एक चीज़ सारी चीज़ नज़र आने लगती हैं। बाकी चीजें बाहरी तौर पर मौजूद होते हुए भी उसके लिए गैर-मौजूद हो जाती हैं। वह अपनी इस सोच में दृढ़ होता रहता है, यहां तक कि उसी एक चीज़ को वह सब से बड़ी चीज़ समझ लेता है, जिस पर शुरू में उसने अपनी नज़रों को जमाया था। यह नाजुक और गंभीर स्थिति है, जिसमें हर इन्सान फंसा हुआ है। अपने प्राकृतिक स्वभाव की वजह से चूंकि दूसरी चीज़ें आदमी के फ़ोकस में नहीं होतीं इसलिए बाक़ी चीज़ों की हैसियत उसके लिए ऐसी हो जाती है जैसे उनकी कोई अहमियत नहीं, बल्कि शायद उनका कोई अस्तित्व ही नहीं। इन्सान की इसी पैदाइशी बनावट की वजह से इन्सान के अन्दर वह कमज़ोरी
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