Al-Risala · September 2023 · page 10

कुरआन आधुनिक साइंस पर बाज़ी ले जाता है।

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۳، صفحہ ۱۰

यह सात वर्ष पहल का बात ह, टारान्टा यूनिवर्सिटी के एक भ्रूण-वैज्ञानिक एक गैरमामूली वैज्ञानिक अभियान पर सऊदी अरब गए। उनसे कुरआन की कुछ आयतों की व्याख्या में मदद चाही गई थी। यह डाक्टर कैथ मूर थे। पहली टेस्ट ट्यूब बेबी के आविष्कारक डा. एडवर्ड ने भी उनकी व्याख्याओं की पुष्टि कर दी थी। उन दिनों वैज्ञानिकों ने मुस्लिम 'उल्मा' को कुरआनी आयतों के बारे में अपनी खोज से हैरान कर दिया था। वही कुरआन जिसको मुसलमान तेरह सौ वर्ष से 'हिफ़्ज़' व 'तिलावत' करते चले आ रहे हैं। जो उन्होंने खोज की थी वह यह थी कि कुरआन में मानव भ्रूण का जो नज़रिया बयान किया गया है वह अब एक निर्विवाद सच्चाई बन कर सामने आया है। और यह कि पश्चिमी खोजकर्ताओं को यह हक़ीक़त 1940 में पता चली और इस सिलसिले में ज़्यादातर मालूमात तो महज़ पिछले पन्द्रह वर्ष में सामने आई हैं। डाक्टर कीथ मूर टोरोंटो यूनिवर्सिटी के एम्ब्रियोलॉजी विभाग के चेयरमैन हैं। इन्सान की तख़्लीक़ और सृजन से ताल्लुक़ रखने वाली कुरआनी आयतों पर अपना ख़ास पेपर पेश करते हुए उन्होंने कहा:

"मुझे इस बात ने हैरत में डाल दिया, जब मुझे यह पता चला कि कुरआन ने सातवीं सदी ईस्वी में जो तथ्य पेश किए वे किस क़दर दुरुस्त और वैज्ञानिक सच्चाइयों से पूर्ण हैं और उनमें कितनी वैज्ञानिक सटीकता है।"

मुसलमानों की आस्था है कि कुरआन सातवीं सदी ईस्वी में ख़ुदा की तरफ़ से अपने पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर उतारा गया।

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