Al-Risala · September 2023 · page 11

कुरआन आधुनिक साइंस पर बाज़ी ले जाता है।

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۳، صفحہ ۱۱

उनक अनुवाद छप चुक हा डॉक्टर मूर कहत ह कि भ्रूण के शुआती 28 दिना में विकास के बारे में कुरआनी आयतों ने जो के तथ्य बयान किए हैं वे इतने सही हैं कि इन्सानी अक्ल को ताज्जुब में डाल देते हैं। डा. मूर को यक़ीन है: कुरआन की आयतें और पैग़म्बरे इस्लाम के कुछ कथन मज़हब और साइंस के बीच मुद्दतों की खाई को पाटने में मदद कर सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कहीं अधकचरी चीर-फाड़ के नतीजे में यह मालूमात सामने आ गई हों, तो उन्होंने कहा कि इस चरण में भ्रूण का आकार एक मिली लीटर के दसवें हिस्से से ज़्यादा नहीं होता। यह इन्सानी आंख को एक छोटे से नुक्ते की शक्ल में नज़र आता है। इसकी शिनाख्त एक ताक़तवर सूक्ष्मदर्शी के बग़ैर मुमकिन नहीं और यह बात अपनी जगह साबित है कि सत्रहवीं सदी ईस्वी से पहले सूक्ष्मदर्शी ईजाद नहीं हुई थी। डाक्टर मूर ने जब अपनी तहक़ीक़ पेश की, उससे दो वर्ष पहले उन्हें जद्दा की शाह अब्दुल अज़ीज़ यूनिवर्सिटी ने बुलाया था। उनके अलावा डाक्टर राबर्ट एडवर्ड्स को भी बुलाया था। यह वही डाक्टर राबर्ट हैं, जिनके कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में किए गए प्रयोग की बदौलत पहले टेस्ट ट्यूब बच्चे की पैदाइश अमल में आई। उनके अलावा डाक्टर टी.वी.एन. प्रसाद और डाक्टर मार्शल जानसन भी आमंत्रित किए गए। डाक्टर मूर कहते हैं कि इस मौके पर होने वाली कान्फ्रेंस के उल्मा ने इन चारों विशेषज्ञों को कुरआन की बहुत सी आयतों के अंग्रेज़ी तर्जुमे पेश किए और उनसे राय मांगी कि क्या इनकी कोई वैज्ञानिक व्याख्या हो सकती है? एक आयत जो पेश की गई वह यह थी:

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