अल्लाह की मदद
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۳، صفحہ ۱۴
यहा पग़म्म्बर का तऱक़ा हो और पग़म्म्बर का तऱक़ा इख़्तियार करने के बाद हो मुसलमान ख़ुदा की उन नुसरतों और मदद के हक़दार बन सकते हैं जिनका वा’दा ख़ुदा ने अपने पैग़म्बर के ज़रिए उनके लिए किया है।
अल्लाह की मदद
पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़माने में और उसके बाद मुसलमानों को जो ग़ैरमामूली फतहें हासिल हुईं, उनकी वजहें बताते हुए इतिहासकारों ने बहुत कुछ लिखा है। इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका (1984) में है:
At least three aspects of the contemporary situation of Byzantium and Persia account for the phenomenal ease with which the Arabs overcame their enemies; first, both empires, exhausted by wars, had demobilized before 632. (vol. 3. p. 557)
उस ज़माने की कुछ बेज़ैन्तीनी और ईरानी शहन्शाहियत के कम से कम तीन पहलू हैं, जो यह बताते हैं कि उनके ऊपर अरबों को इतनी आसानी से इतनी बड़ी कामयाबियां कैसे हासिल हुईं उनमें से पहली वजह तो यह है कि दोनों शहन्शाहियतें आपस की जंग के नतीजे में इतनी बरबाद हो गई थीं कि वे 632 ई. से पहले ही फौजी एतिबार से ख़त्म हो चुकी थीं। तारीख़ के लिहाज़ से इस बात में बहुत कम (आंशिक) सच्चाई है। क्योंकि यह
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