عورت کا میدانِ کار
الرسالہ، نومبر ۲۰۲۳، صفحہ ۷
मक्का का छोड़ कर हबश चल जाओ। हबश में एक बादशाह है, जिसके यहां किसी पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाता। तुम लोग उसके मुल्क में चले जाओ। यहां तक कि अल्लाह तआला तुम्हारे लिए कोई गुंजाइश पैदा कर दे। तो इस तरह सहाबा एक सौ से ज़्यादा तादाद में अपना वतन छोड़ कर हबश चले गए। मक्का के कुरैश को मालूम हुआ तो उन्होंने मश्वरा करके अपने दो आदमियों को हबश रवाना किया। वहां उन्होंने बादशाह के दरबारियों को तोहफ़े दे कर इस पर राज़ी कर लिया कि बादशाह के यहां वे उनकी सिफ़ारिश करेंगे। इसके बाद मक्का का प्रतिनिधि मंडल हबश के बादशाह नजाशी के दरबार में दाखिल हुआ। उन्होंने बादशाह से कहा कि हमारे शहर के कुछ नादान लोग अपने बाप-दादाओं का दीन छोड़ कर आपके मुल्क में आ गए हैं। अब उनके ख़ानदान और क़बीले के लोगों ने हमको यहां भेजा है कि हम उन्हें उनके घरों की तरफ़ वापस ले जाएं। हम चाहते हैं कि आप हमें इसकी इजाज़त दें दें और उनको हमारे हवाले कर दें। तमाम दरबारियों ने उनकी इस मांग की हिमायत की। मक्का का प्रतिनिधिमंडल यह चाहता था कि सिर्फ़ उनके कहने पर बादशाह मुसलमानों को उनके हवाले कर दे। और ख़ुद मुसलमानों को बुला कर उनसे कोई पूछताछ न करे। जब उन्होंने बादशाह से अपनी इस ख़्वाहिश का इज़हार किया तो बादशाह बिगड़ गया। उसने कहा, "ख़ुदा की क़सम नहीं। मैं हरगिज़ उनको तुम्हारे हवाले नहीं करूंगा, जब तक ऐसा न हो कि मैं उनको अपने यहां बुलाऊं और उनसे बात करूं और देखूं कि उनका मामला क्या है।
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