Al-Risala · November 2023 · page 10

عورت کا میدانِ کار

الرسالہ، نومبر ۲۰۲۳، صفحہ ۱۰

उसके स्वाथ के खिलाफ़ क्या न हो। यहाँ वे बुलन्द रूह ह, जिनका क़ियामत में अर्शे-ख़ुदावन्दी के साए में जगह दी जाएगी । अल्लाह के डर की वजह से कोड़ा हाथ से गिर पड़ा अबू मसूद बदरी रज़ि अल्लाहू अन्हु कहते हैं। एक रोज़ मैं किसी बात पर अपने गुलाम से ख़फ़ा हो गया और उसको कोड़े से मारने लगा। इतने में पीछे से आवाज़ सुनाई दी: "ऐ अबू मसूद, जान लो। “ मगर मैं गुस्से की हालत में था। आवाज़ को पहचान न सका। आवाज़ देने वाला जब मेरे क़रीब आ गया तो मैंने देखा कि वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हैं। आप फ़रमा रहे थे: अबू मसूद जान लो, तुमको जितना क़ाबू उस शख़्स पर है, उससे ज़्यादा क़ाबू अल्लाह को तुम्हारे ऊपर है । यह सुन कर कोड़ा मेरे हाथ से गिर गया। मैंने कहा: “अब कभी मैं किसी गुलाम को न मारूंगा। मैं इस गुलाम को अल्लाह की खुशी के लिए आज़ाद करता हूं। “ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: अगर तुम ऐसा न करते आग की लपट तुमको छू लेती (मुस्लिम) । ये विशेष्ञ प्रोफेसर राज कृष्ण (1925-1985) भारत के पचास बड़े प्रतिभाशाली लोगों में गिने जाते थे ।

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