Al-Risala · January 2023 · page 56

اقوال حکمت

الرسالہ، جنوری ۲۰۲۳، صفحہ ۵۶

पर खुल गया कि यह सच्चा दान हो। वह उसी वक़्त ईमान लाए और रात हुए सज्दे में गिर पड़े (5:83)। इस आयत में ईमान को मारिफ़त (बोध) कहा गया है। यानी सच को पहचान लेना। जिस चीज़ की पहचान हो, उसी के लिहाज़ से आदमी के अन्दर भाव पैदा होते हैं। ख़ुदा चूंकि सबसे बड़ी ताक़त है इसलिए ख़ुदा की पहचान से आदमी के अन्दर विनम्रता और छोटेपन का भाव पैदा होता है। इसलिए नज़रान के लोगों में जब ख़ुदा की मारिफ़त पैदा हुई, जब उन पर ख़ुदा की अज़मत और बढ़ाई खुल गई तो उनका सीना फट गया। उनकी आँखों से आंसू बहने लगे और वे बेइख़्तियार होकर सज्दे में गिर पड़े। इसी तरह सहीह मुस्लिम में एक रिवायत है, जो हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान के वास्ते से नक़्ल हुई है। वह कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जो शख़्स इस हाल में मरा कि वह जानता था कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं वह जन्नत में दाख़िल होगा। (सहीह मुस्लिम, 26)

इस हदीस में ईमान को इल्म कहा गया है। यानी जानना, आगाह होना। इससे मालूम होता है कि ईमान जानने का एक वाक़िआ है। वह एक चेतनामय खोज है। हक़ीक़त यह है कि ईमान उसी क़िस्म का एक गहरा तजुर्बा है, जिसको मौजूदा ज़माने में डिस्कवरी कहते हैं। ईमान एक डिस्कवरी है। ईमान एक ऐसी हस्ती की मौजूदगी को पा लेना है, जो ज़ाहिरी तौर हमारे सामने मौजूद नहीं। ईमान उस गहरे 'बोध' का नाम है, जबकि आदमी के लिए परोक्ष का पर्दा फट जाता है और वह ख़ुदा को न देखते हुए भी उसे देखने लगता है। ईमान बन्दे और ख़ुदा के बीच उस ताल्लुक़ का क़ायम होना है, जिसकी एक भौतिक मिसाल बल्ब और पावर हाऊस के ताल्लुक़ में दिखाई देती है। बल्ब का ताल्लुक़ जब पावर हाउस से क़ायम होता है तो वह अचानक चमक उठता है। वह एक नया इंसान बन जाता है। उसका अंधेरा उजाले में तब्ब्दील हो जाता है। उसी तरह

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