Al-Risala · March 2024 · page 4

अजीब करिश्मा

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۴، صفحہ ۴

इन्सान के बेहद क़ीमती हान का अन्दाज़ा उस वक़्त होता है जबकि उसका कोई अंग उससे छीन लिया जाए। इन्सान का एक हाथ कट कर उससे अलग हो जाए अरबों डालर अदा करके भी दोबारा वैसा हाथ उसको नहीं मिल सकता। इन्सान की आंख अगर बेनूर हो जाए तो सारी दुनिया की दौलत भी उसको वह आंख नहीं दे सकती, जिससे वह दोबारा देखने लगे। इन्सान की ज़ुबान अगर जाती रहे तो कोई भी क़ीमत अदा करके वह बाज़ार से ऐसी चीज़ नहीं पा सकता, जिससे वह बोले और अपने ख़यालात का इज़हार कर सके। कैसी अजीब है ख़ुदा की कारीगरी कि वह बेक़ीमत चीज़ों से बेइन्तिहा क़ीमती चीज़ बनाता है। वह मुर्दा चीज़ को ज़िन्दा चीज़ में तब्दील करता है। वह बेशऊर, बेजान माद्दे से बाशऊर और जानदार मख़्लूक़ वजूद में लाता है। वह 'नहीं' से 'है' की रचना करता है। किसी जादूगर की छड़ी से एक पत्थर कोई आवाज़ निकाले तो उसको देख कर सारे लोग हैरान रह जाएंगे। लेकिन ख़ुदा बेशुमार इन्सानों को माद्दे से बना कर खड़ा कर रहा है। मगर उसको देख कर किसी को हैरानी नहीं होती। कैसे अंधे हैं वे लोग, जिनको जादूगर के करिश्मे दिखाई देते हैं, मगर ख़ुदा के करिश्मे दिखाई नहीं देते। कैसे बेअक़्ल हैं वे लोग जो झूठे करिश्मे दिखाने वालों के सामने सम्पूर्ण श्रद्धा बन जाते हैं। मगर जो हस्ती सच्चे करिश्मे दिखा रही है, उसके लिए उनके अन्दर श्रद्धा व प्रेम का जज़्बा नहीं उमडता।

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