अजीब करिश्मा
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۴، صفحہ ۳
गए वक़्त म वह मशान तैयार न कर सका। जब वक़्त पूरा हो गया ता कबाल के लाग उसको मारने के लिए दौड़ पड़े। उनके हाथ में बरछा था। हॉव ने ग़ौर से देखा तो हर बरछे की नोक पर एक सुराख़ था। यही देखते हुए उसकी नींद खुल गई। हॉव को सिरा मिल गया। उसने बरछे की तरह अपनी सुई में भी नोक की तरफ़ छेद बनाया और उसमें धागा डाला। अब मसला हल था। धागे का छेद ऊपर होने की वजह से मशीन काम नहीं कर रही थी। वह नीचे की तरफ़ छेद करने के बाद बख़ूबी काम करने लगी। हॉव के साथ दिक्क़त यह थी कि वह पारंपरिक ज़ेहन से ऊपर उठ कर सोच नहीं पाता था। वह समझ रहा था कि जो चीज़ हज़ारों साल से चली आ रही है वही सही है। जब उसके अवचेतन ने उसको तस्वीर का दूसरा रुख़ दिखाया तो वह मामले को समझा और उसको फ़ौरन हल कर लिया। जब आदमी अपने आपको जी-जान से किसी काम में लगा दे तो वह इसी तरह उसके रहस्यों को पा लेता है।
अजीब करिश्मा
इन्सान का जिस्म कुछ माद्दी और भौतिक चीज़ों मिल कर बना है। पानी, कार्बन, ऑक्सीजन और कुछ दूसरे रासायनिक तत्व। ज़ाहिरी तौर पर इन्सान बस इसी क़िस्म को कुछ चीज़ों का मजमूआ है। राबर्ट पैटिसन (R. Pattison) ने इन्सानी जिस्म के इन भौतिक तत्वों का हिसाब लगाया तो उसने पाया कि बाज़ार के रेट
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