अजीब करिश्मा
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۴، صفحہ ۷
इन्सान मजबूर है कि वह किसी को अपना मा 'बूद (उपास्य, आराध्य) बनाए- ख़ुदा को या ख़ुदा को छोड़कर किसी और को। इन्सान किधर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (1944-1991) लोकसभा के दसवें चुनाव (मई 1991) के अभियान पर थे। वह देश भर का तूफ़ानी दौरा करते हुए 21 मई 1991 को अपने विशेष विमान के ज़रिए तमिलनाडु पहुंचे। वह हवाई अड्डे मीनमपक्कम पर उतरे। यहां वह अपनी बुलेट प्रुफ़ गाड़ी में बैठे। और तीस से ज़्यादा कारों के काफिले के साथ श्रीपेरुम्बुदुर के लिए रवाना हुए, जहां उन्हें एक चुनाव- सभा को सम्बोधित करना था। रात को दस बजे वह पंडाल के अन्दर जनता की तरफ़ से गुलदस्ते स्वीकार कर रहे थे। उसी दौरान एक 25 वर्षीया महिला अपने दोनों हाथों में फूलों का एक गुलदस्ता लिए हुए राजीव गांधी की तरफ़ बढ़ी। राजीव गांधी भी विजयभाव से उसकी तरफ़ बढ़े, क्योंकि हर जगह जनता से मिले स्वागत ने उन्हें यकीन दिलाया था कि इस चुनाव के बाद वे देश के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। महिला ने पास आकर अपना गुलदस्ता राजीव गांधी की तरफ़ बढ़ाया। पर उस महिला का सम्बंध आत्मघाती दस्ते से था और वह अपने जिस्म पर ख़तरनाक बम बांधे हुए थी। राजीव गांधी ने गुलदस्ता अपने हाथ में लिया ही था कि बम फट गया।
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