ज़माने के ख़िलाफ़
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۴، صفحہ ۱۵
मालूम हुआ कि औरत की आज़ादी के साथ सुरक्षा (Protection) का ज़रूरत ह सिर्फ़ अपने निजी आधार पर वह खड़ी नहीं हो सकती। महिला आन्दोलन द्वितीय की एक नेता टार व्हेलम (Tarr-Whelam) ने कहा कि यह बात साफ़ है कि औरतों के हुकूक (अधिकार) हासिल करने के लिए अब राज्य ही हमारे लिए अमल का मुक़ाम हैं:
But it is clear that to win women's rights, the states are now the place for action (p. 37). पश्चिमी औरत ने पहले बराबरी का हक़ मांगा था। उसको बराबरी का हक़ मिल गया। अब उसे मालूम हुआ कि सिर्फ़ बराबरी का हक़ काफ़ी नहीं। उसको इसी के साथ एक्स्ट्रा सपोर्ट की ज़रूरत है। वह घरेलू सरपरस्त को अपना सरपरस्त बनाने पर राज़ी नहीं हुई। नतीजा यह है कि उसे हुकूमत को अपना सरपरस्त (संरक्षक) बनाना पड़ा। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि ज़माना आज इस्लाम के अनुकूल दिशा में जा रहा है। इन्सान के अनुभव उसको इस तरफ़ ले जा रहे हैं कि वह यह मानने पर मजबूर हो जाए कि ख़ुदा का कानून ही सही कानून है। कोई बड़ा काम सिर्फ़ वह शख़्स करता है जो अपने आपको छोटा काम करने पर राज़ी कर ले
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