इबादत
الرسالہ، مئی ۲۰۲۳، صفحہ ۴
ज़्यादा होगा कि दरख़्त और मक़ानात तो दरकिनार, पहाड़ भी उसके आगे ठहर न सकेंगे। तमाम ज़िन्दा और ग़ैर-जिन्दा चीज़ें उसकी लपेट में आ जाएंगी। उसकी बेपनाह तीव्रता ज़मीन की सतह की हर चीज़ को उलट-पुलट कर रख देगी। इन्सानी सभ्यता के तमाम निशान इस तरह मिट जाएंगे जैसे वे तिनकों से भी ज़्यादा बेक़ीमत थे। आज की आंधी एक मोटर कार को कुचलती है, क़ियामत की आंधी पूरी इन्सानी सभ्यता को कुचल डालेगी। आज का भूचाल एक शहर को तलपट करता है, क़ियामत का भूचाल पूरी सृष्टि को तलपट कर देगा। आज की मौत एक आदमी की जान लेती है। क़ियामत की मौत तमाम इन्सानों को मौत की हलाकत से दोचार होने पर मजबूर कर देगी। आज ख़ुदा का फ़ैसला आंशिक रूप में ज़ाहिर हो रहा है, कल ख़ुदा का फ़ैसला अपनी मुकम्मल सूरत में जाहिर हो जाएगा। यह क़ियामत जब आएगी तो वह इस बात का ऐलान होगी कि मौजूदा दुनिया के इम्तिहान की मुद्दत पूरी हो गई। अब दुनिया का मालिक इम्तिहान की दुनिया को तोड़ कर दूसरी सम्पूर्ण दुनिया बनाएगा जहां नेक लोगों को उनकी नेकी का इनाम मिले और बुरे लोगों को उनकी बुराई का बदला दिया जाए। आज के छोटे तूफ़ान आइन्दा आने वाले बड़े तूफ़ान की पूर्व सूचना दे रहे हैं। जो लोग इस चेतावनी से जाग उठेंगे वही आंख और कान वाले हैं। और जो लोग कुदरत की इस चेतावनी के बावजूद न जागें वे अंधे और बहरे हैं। उनके लिए हमेशा की बर्बादी के सिवा कोई और अंजाम नहीं।