ایک رجل سعید کا انتقال
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۴، صفحہ ۴
कुरआन म ह कि मन जिन्न आर इन्सान का सिर्फ अपना इबादत के लिए बनाया है (अल-ज़ारियात 56)| इसका मतलब यह है कि इन्सान के अन्दर इबादत और सज्दा करने का जज़्बा छुपा हुआ है और वह मूलतः सृजनहार के लिए है। इसका सही इस्तेमाल यह है कि आदमी संसार के पालनहार को सज्दा करने वाला बन जाए। पर जो लोग ख़ुदा को पाए हुए न हों वे अपनी बेख़बरी के कारण किसी गैर-ख़ुदा को सज्दा करने वाले बन जाते हैं। इस घटना से यह बात और भी मालूम हुई कि तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत एक ऐसी दावत है जिसका आधा रास्ता पहले ही तय हो चुका है। इन्सान अपनी जन्मजात प्रकृति के तहत पहले से ही अपने अन्दर यह तत्परता और यह आग्रह लिए हुए है कि वह किसी बड़ी हस्ती के आगे अपने आप को झुका दे। अब सच्चाई की तरफ़ बुलाने वालों का काम सिर्फ़ इतना है कि वे इन्सान को यह बता दें कि तुम्हारी प्रकृति जिस हस्ती के आगे झुकना चाहती थी वह हस्ती दरअसल तुम्हारा सृजनहार है। इस मामले में एक फ़ारसी शायर का एक शेर याद आता है, जिसका अर्थ है: सारे हिरन अपना सिर हथेली पर लिए हुए इस इंतज़ार में हैं कि तू आए और उनका शिकार करे। कारोबारी स्थायित्व
‹ Previous page Next page › Contents of July 2024 All issues