Al-Risala · July 2024 · page 3

ایک رجل سعید کا انتقال

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۴، صفحہ ۳

आस्तित्व जिस आख़िरी हालत म ढल जाता ह वहा सज्दा ही सजद का हालत समर्पण की आख़िरी हालत है। इसके बाद व्यावहारिक समर्पण का और कोई दर्जा नहीं। सज्दे की हालत में अपने आपको पहुंचा कर इन्सान इस एहसास से दो-चार होता है कि उसने अपने आपको आख़िरी हद तक हवाला किए जाने वाले के हवाले कर दिया। यही वजह है कि जब भी किसी इन्सान के अन्दर पूर्ण समर्पण की ख़्वाहिश उभरती है तो वह फ़ौरन सज्दे की हालत में गिर जाता है। Mr. Subash Chandra Nayak, Congress MP from Orissa, a first timer in the Lok Sabha, kneels down in symbolic respect to Parliament House, on Tuesday. —Times of India इसकी एक मिसाल उपरोक्त घटना है। यहां दी गई यह तस्वीर (टाइम्स ऑफ इंडिया, 10 जुलाई 1991) के फोटोग्राफर ने दसवीं लोक सभा के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर खींची थी। उस दिन लोक सभा अध्यक्ष की तरफ़ से नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिला कर दसवीं लोक सभा का औपचारिक गठन किया गया था। लोकसभा में 507 निर्वाचित सदस्य हैं। उनमें से आधे सदस्य नए हैं। उन्हीं में से एक श्री सुभाष चन्द्र नायक हैं। वह जब नई दिल्ली के भव्य संसद भवन के सामने पहुंचे और उसमें दाखिल होने लगे तो वह घटना घटी, जिसे अख़बारी रिपोर्टर के कैमरे ने रिकार्ड कर लिया। संसद की महानता और पवित्रता के एहसास से वशीभूत होकर वह उसके आगे सज्दे में गिर पड़े।

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