Al-Risala · July 2024 · page 9

शहद का सबक़

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۴، صفحہ ۹

इस तरह का बशुमार व्यवस्थाए ह जो शहद का तयारा म का जाता हो। ख़ुदा ऐसा कर सकता था कि चमत्कारिक ढंग से अचानक शहद पैदा कर दे या पानी की तरह शहद का झरना ज़मीन पर बहा दे। पर उसने ऐसा नहीं किया। ख़ुदा हर क़िस्म की सामर्थ्य रखने के बावजूद शहद को एक व्यवस्था के तहत तैयार करता है, ताकि इन्सान को सीख मिले। वह जाने कि ख़ुदा ने दुनिया की व्यवस्था किस ढंग पर बनाई है और किन सिद्धांतों और नियमों को अपना कर ख़ुदा की इस दुनिया में कोई शख़्स कामयाब हो सकता है। शहद की मक्खी जिस तरह काम करती है, उसे योजनाबद्ध कार्य कहते हैं। यही उसूल इन्सान के लिए भी है। इन्सान भी सिर्फ़ उस वक़्त कोई सार्थक सफलता अर्जित कर सकता है, जबकि वह योजनाबद्ध कार्य के ज़रिए अपने मक़सद तक पहुंचने की कोशिश करे। संगठित और योजनाबद्ध कार्य ही इस दुनिया में कामयाबी हासिल करने का एकमात्र विश्वसनीय तरीक़ा है, शहद की मक्खी के लिए भी और इन्सान के लिए भी। चुप की ताक़त पुरानी कहावत है कि ‘एक चुप हज़ार बला टालती है।’ यह कहावत बहुत सार्थक है और लंबे इंसानी तजुर्बों पर आधारित है। हक़ीक़त यह है कि चुप रहना अपने आप में ख़ुद एक ताक़तवर हथियार है, बशर्ते कि इस हथियार को उसके तमाम तक़ाज़ों के साथ इस्तेमाल किया जाए।

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