Unilateralism is the Best.
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۴، صفحہ ۱۳
और इसी सब्र में बेहतर इन्सानी समाज का रहस्य छुपा हुआ है। अशुभ से शुभ एक वृक्ष की सफलता इसी में है कि वह छोटे को बड़ा बना सके, मामूली को विशिष्ट में बदल सके। वह जड़ पदार्थ (बीज) को बढ़ती हुई चीज़ों में बदल देता है। वह बाहर से मिट्टी, पानी और गैस लेता है। और उसको पत्ती, फूल और फल रूप में सामने ले आता है। इसी तरह किसी इंसानी समाज का बेहतर समाज होना इस बात पर निर्भर है कि उसके तमाम लोग यह योग्यता रखते हों कि वे छोटे सलूक को ऊंचे सलूक में बदल सकें। इस मामले में इंसान के मनोवैज्ञानिक अस्तित्व को भी ऐसा ही होना चाहिए जैसा बनाने वाले ने उसके बॉयलाजिकल (जीव-वैज्ञानिक) अस्तित्व को बनाया है। इंसान जो चीज़ें खाता है उनमें एक अंश शक्कर (चीनी) का होता है। शक्कर अपनी पहले की सूरत में इंसान के लिए बेफ़ायदा है इसलिए इंसान के जिस्म में अग्नाशय (Pancreas) की व्यवस्था की गई है, जिसका काम है शक्कर को ऊर्जा (एनर्जी) में बदल देना। इसी 'बदलने' की योग्यता पर इंसान की ताक़त और स्वास्थ्य निर्भर है। जिस आदमी के जिस्म का यह सिस्टम बिगड़ जाय उसके अन्दर जाने वाली शक्कर ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होगी। वह या तो ख़ून में शामिल हो जाएगी या पेशाब के रास्ते बाहर आने लगेगी। इसके बाद इंसान बेहद कमज़ोर हो जायगा। इसी से वह बीमारी पैदा होती है, जिसे मधुमेह (डायबिटीज) कहा जाता है।
‹ Previous page Next page › Contents of July 2024 All issues