Unilateralism is the Best.
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۴، صفحہ ۱۴
इसक सिवाय कोइ नहा कि उसम दुबारा यह उच्च याग्यता पदा का जाया। आजकल हमारे समाज में जो बिगाड़ और टकराव पाया जाता है, उसका कारण यह नहीं कि लोगों के बीच सांस्कृतिक भेद है। उसका सही कारण यह है कि हमारे समाज के लोग मनोवैज्ञानिक रूप से डायबिटिक हो गए हैं, उनमें शक्कर को ऊर्जा में बदलने की योग्यता नहीं रही। उनमें यह सामर्थ्य नहीं रही कि वे 'बेताक़त' को अपने लिए 'ताक़त' बना लें। सामाजिक ज़िन्दगी में हमेशा ऐसा होता है कि आदमी के साथ अशोभनीय बातें होती हैं। एक आदमी को दूसरे आदमी के साथ शिकायत पैदा हो जाती है। किसी के हित दूसरे के स्वार्थ से टकरा जाते हैं, एक व्यक्ति ऐसे शब्द बोलता है जिन्हें सुनकर दूसरा व्यक्ति महसूस करता है कि वह उसकी निजी या सामाजिक हैसियत पर चोट कर रहा है, उसकी मानहानि कर रहा है। समाज में इस तरह की घटनाएं अवश्य ही घटती हैं और घटती रहेंगी। हमारे लिए यह सम्भव नहीं है कि हम ऐसी घटनाओं को होने से रोक दें। हमारे लिए जो चीज़ मुमकिन है वह सिर्फ़ यह है कि हम ऐसी घटनाओं से नकारात्मक (निगेटिव) प्रभाव न लें। एक स्वस्थ आदमी अपने अन्दर जाने वाली शक्कर को ऊर्जा में बदलता है। तब्दीली की यही प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक तौर पर भी होनी चाहिए। इस दुनिया में बेहतर सामाजिक ज़िन्दगी बनाने का रहस्य यह है कि लोगों की चेतना को
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