Al-Risala · September 2024 · page 2

16 جون 1986

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۲

विश्लेषण किया जाता है तो मालूम होता है कि तमाम चीज़ अपना आतम सच्चाई की दृष्टि से परमाणु (एटम) का संकलन हैं। हर चीज़ अंततः एटम है, चाहे वह ऊपर से कुछ भी दिखाई देती हो। यही क़ायनाती पैटर्न इन्सानों के अन्दर भी रखा गया है। इन्सान ऊपर से देखने में एक-दूसरे से अलग नज़र आते हैं। उनमें रंग और नस्ल के लिहाज़ से बहुत सी भिन्नताएं पाई जाती हैं, पर अगर उनका ऐतिहासिक विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि तमाम नस्लें आख़िरकार एक मां-बाप पर जाकर ख़त्म होती हैं। यानी सब एक-दूसरे के भाई हैं, न कि एक-दूसरे के पराए। यही बात कुरआन में इन शब्दों में कही गई है: ऐ लोगो, अपने रब से डरो, जिसने तुमको एक जान से पैदा किया, और उससे उसका जोड़ा निकाला। और फिर उन दोनों से बहुत से मर्द और औरत ज़मीन में फैला दिए। (4:1) यही बात हदीस में इस तरह आई है: सुन लो कि तुम सब आदम की औलाद हो और आदम मिट्टी से थे। (मुसनद अहमद, हदीस संख्या 8736) इन्सानी एकता की यह परिकल्पना हर इन्सान के दिल में दूसरे इन्सान के लिए मुहब्बत और सद्भाव पैदा करती है। वह पूरी इन्सानी नस्ल को एक कुटुम्ब, एक ख़ानदान और एक बिरादरी बना देती है। हदीस में कहा गया है: “तमाम मख़लूक (जीवधारी) अल्लाह की कुटुम्ब है। तमाम लोगों

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