16 جون 1986
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۳
in diversity) का नियम चल रहा है तो इन्सान के लिए यह दुरुस्त नहीं कि वह अनेक को एक करने (unification of diversity) के तरीके पर जिंदगी की व्यवस्था बनाने की कोशिश करे। तरक्क़ी और एकता आजकल जो चीज़ सबसे ज़्यादा बहस का विषय बनी हुई है वह राष्ट्रीय एकता (national integration) है। व्यापक अर्थों में इसको मानवीय एकता कहा जाता है। इसमें शक नहीं कि यह एकता आज हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत है। इसी पर देश की तरक्क़ी और कामयाबी निर्भर है। पर इस मामले में बोलने वाले जो कुछ बोल रहे हैं या लिखने वाले जो कुछ लिख रहे हैं, उसको देख कर मुझे ऐसा लगता है कि इस बारे में लोगों का ज़ेहन साफ़ नहीं है कि वे जो कुछ चाहते हैं उसको हासिल करने का तरीक़ा क्या है। ज़्यादातर लोगों की तरफ़ से यह कहा जा रहा है कि नेशनल इंटेग्रेशन का रास्ता कल्चरल इंटेग्रेशन से है। यानी लोगों में एकता पैदा करने का तरीक़ा यह है कि उनका कल्चर (संस्कृति) एक कर दिया जाए। भाषा, धार्मिक रीति रिवाज, पहनावा, त्यौहार, शादी-ब्याह, इस तरह की तमाम सांस्कृतिक चीज़ों को सबके लिए समान (काममन) और साझा बना दिया जाए। इस तरह लोगों में वह एकता या इंटेग्रेशन पैदा हो जायगा, जिसकी हमें ज़रूरत है।
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