16 جون 1986
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۵
भातिक ख़ुराक के लिहाज़ से यह चन्द बच्चों का वाकिआ है, लाकन नातक ख़ुराक की दृष्टि से देखिए तो आज यही तमाम इन्सानों का वाक़िआ है। आज की दुनिया में तामाम इन्सान ऐसी नैतिक ख़ुराकें खा रहे हैं जो उनकी इन्सानियत के लिए ज़हर हैं, जो उनको हमेशा की बरबादी से दो-चार करने वाली हैं। झूट, दुराचार, रिश्वत, अहंकार, ईर्ष्या, ज़ुल्म, अपहरण, अवैध क़ब्ज़ा, बदियानती, वादाखिलाफ़ी, बदख़्वाही, बेउसूली, बद-मामलगी, अविश्वास, ग़लती न मानना, एहसानफ़रामोशी, ख़ुदग़र्ज़ी, इन्तिक्राम, उत्तेजना, अपने लिए एक चीज़ पसन्द करना और दूसरे के लिए कुछ और पसन्द करना, यह तमाम चीजेंै नैतिक अर्थों में ज़हरीली ख़ुराकें हैं। आज तमाम लोग चीज़ों को मीठी शक्कर समझ कर खा रहे हैं। मगर वह वक़्त ज़्यादा दूर नहीं जब उनका ज़ेहरीलापन ज़ाहिर होगा, और फिर इन्सान अपने आपको इस हाल में पाएगा कि वहां न कोई उसकी फ़रियाद सुनने वाला होगा और न कोई उसका इलाज करने वाला। सृष्टि में एकत्व सृष्टि का अध्ययन बताता है कि पूरी सृष्टि एक केन्द्र के चारों तरफ़ घूम रही है। एटम का एक न्यूक्लियस है और एटम का पूरा ढांचा उस न्यूक्लियस के चारों
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