Al-Risala · September 2024 · page 4

16 جون 1986

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۴

गई तरकीबों से राष्ट्रीय एकता या नेशनल इंटग्रेशन भी पैदा नहीं किया जा सकता। सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय एकता का रहस्य एक कल्चर में नहीं है, बल्कि एक ज़ेहन में है। इस उद्देश्य के लिए हमें लोगों के अन्दर इसके अनुकूल सोच पैदा करनी होगी। प्लास्टिक सर्जरी जैसा कोई उपाय ऊपरी शक्ल को तो बदल सकता है, पर वह अन्दरूनी सोच को नहीं बदल सकता। और महज़ ऊपरी चीज़ों को एक कर देने से कभी सच्ची एकता पैदा नहीं हो सकती। अख़्लाक़ी ज़हर 6 जनवरी, 1990 को दिल्ली (शहूरपुर) में एक दर्दनाक हादसा हुआ। कुछ छोटे बच्चे एक मैदान में खेल रहे थे। वहां एक तरफ़ कूड़े का ढेर था। वे खेलते हुए उस कूड़े तक पहुंच गए। यहां उन्हें एक पड़ी हुई चीज़ मिली। यह कोई ज़हरीली चीज़ थी। मगर उन्होंने उसको बेख़बरी में उठा कर खा लिया। इसके नतीजे में दो बच्चे फ़ौरन ही मर गए, और आठ बच्चों को गम्भीर हालत में जयप्रकाश नारायण अस्पताल में दाख़िल करना पड़ा। ये बच्चे दो साल से पांच साल तक के थे। टाइम्स ऑफ़ इंडिया (7 जनवरी 1990) ने पहले पेज पर इसकी ख़बर देते हुए लिखा है कि इन बच्चों में से एक ने वहां एक छोटा पैकेट पाया। देते उसमें करीब डेढ़ सौ ग्राम कोई सफ़ेदम रंग का चूर्ण था। उन्होंने ग़लती से उसको शक्कर

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