16 جون 1986
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۷
प्रभुत्वशाली (अज़ाज़) व ज्ञानवान (अलार्म) का बांधा हुआ अंदाज़ा है। और चांद के लिए हमने मंजिलें निर्धारित कर दीं, यहां तक कि वह ऐसा रह जाता है जैसे खजूर की पुरानी शाख़ा। न सूरज के वश में है कि वह चांद को पकड़ ले और न रात दिन से पहले आ सकती है। और सब एक-एक दायरे में तैर रहे हैं।” (36:38-40)
इन आयतों में उस आकाशीय सच्चाई की तरफ़ संकेत किया गया है कि इस क़ायनात के तमाम घूमने वाले सितारे और सैय्यारे (गृह व नक्षत्र) अपनी- अपनी कक्षा (Orbit) में ठीक-ठीक और सुनिश्चित ढंग से घूमते हैं। वे कभी अपनी हद को छोड़कर दूसरे की हद में दाख़िल नहीं होते। यही हदबन्दी या सीमाबद्धता इंसान के लिए भी आदर्श है। कुरान में कहा गया है कि जो लोग ख़ुदा की क़ायम की हुई हदों को तोड़ते हैं वे ख़ुदा की नज़र में ज़ालिम (अत्याचारी) हैं। (2:229)
यही बात हदीस में इन शब्दों में कही गई है:
“और अल्लाह ने हदें क़ायम कर दी हैं। तो तुम उन हदों का उल्लंघन न करो” (अल-मुसतदरक अल-हाकिम, हदीस संख्या 7114)
एक और हदीस में इस बात को मिसाल के ज़रिए इस तरह स्पष्ट किया गया है: “मोमिन की मिसाल और ईमान वाले की मिसाल ऐसी है जैसे घोड़ा,
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