Al-Risala · September 2024 · page 16

ख़ुदा की हिफ़ाज़त में

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۶

चाहत ह तो बुनियाद आर दावार का निर्माण करन के बाद हा यह हो सकेगा कि आप अपने लिए एक ऊँचा मकान खड़ा कर सकें। ठीक यही मामला समाज और राष्ट्र के निर्माण का भी है। समाज का निर्माण इतिहास बनाने वाले भाषणों से नहीं होता, बल्कि इतिहास बनाने वाले कर्म से होता है। समाज व मिल्लत का मज़बूत किला मज़बूत पत्थरों से बनता है न कि शाब्दिक भाषणबाजी और शायराना भावुकता का कमाल दिखाने से। मौजूदा ज़माने में जो मुस्लिम नेता उठे, हरेक ने किसी न किसी ‘मुजाहिदाना प्रयास’ से अपने काम की शुरूआत की। हालांकि सही तरीका यह था कि वे वैचारिक सुधार और मानसिक जागरण से अपना काम शुरू करते। यही कारण है शोर भरे हंगامों के बावजूद अब तक कोई नतीजाखेज़ काम न हो सका। समाज के निर्माण का काम वैचारिक निर्माण और मानसिकता के सुधार से शुरू होता है, उसको व्यावहारिक पहल (दूसरे शब्दों में छलांग) से शुरू नहीं किया जा सकता। बड़ों को सभी के जनाज़ों में शामिल होना चाहिए। मदीने में एक काले रंग की बावली-सी औरत थी। वह मसजिद का कूढ़ा साफ़ किया करती थी। उसका इन्तिकाल हुआ तो चन्द लोगों ने उसको दफ़न कर दिया और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसकी ख़बर न दी।

‹ Previous page Next page › Contents of September 2024 All issues

Printed page