Al-Risala · November 2024 · page 11

मेयार को बुलन्द करना

الرسالہ، نومبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۱

جس اس گھر کے اندر بات کرتے ہوئے خود نبأ موجود ہو (جامعُ ال۔ اسُول، اِبْن ال۔ اسِیر، بھاگ 1، پیج 194)

یہ بات ویسے تو ایک سادہ سی بات ہے، لیکن ہے بہت اھم۔ آج انسان کے پاس صرفٔ پَیغَمبرے-اِسلام سللللاہو अलैहि वसल्लम ही का कलाम नहीं है، بلکہ دوسرے پَیغَمبروں کا कलाम भी موجود ہے۔ مسلن تورات اور انجیل میں بہت سے نبیوں کے कलाम मौजूद हैं، مگر ان کتابوں کے بارے میں نہیں کہا جا سکتا کہ جس گھر میں یہ کتابیں ہیں، اس گھر میں اَمبیا بات کرتے ہوئے موجود ہیں، جبکہ پَیغَمبرے اِسلام کے بارے میں یہ بات بالکل لَفزی طور پر درست ہے۔

اس फ़र्क की वजह यह है कि दूसरे पैग़म्बरों का जो कलाम आज मज़हबी किताबों में मौजूद है वह भरोसे के लायक नहीं है। उनमें मिलावट और नक़्ल के नतीजे में बहुत-सी तब्दीलियां हो चुकी हैं। इस तरह वैसे तो पैग़म्बर का कलाम मौजूद है लेकिन वह इस रूप में नहीं है कि उन पर भरोसा किया जा सके। जबकि पैग़म्बर-इस्लाम (स.अ.व.) का मामला बिल्कुल अलग है। आपका कलाम पूरी तरह पैग़म्बर का कलाम है। आपके कलाम के संकलन और सम्पादन में इतनी ज़्यादा मेहनत और एहतियात की गई है और उसकी शुद्धता और स्वस्थता का इतना ज़्यादा ध्यान रखा गया है कि आज जो ‘हदीस का संग्रह’ हमारे पास मौजूद है, उसके बारे में पूरे भरोसे के साथ कहा जा सकता है कि वे पैग़म्बर के शब्द हैं। इस तरह पैग़म्बरे इस्लाम जैसे हमेशा के लिए हमारे बीच में मौजूद हैं। वह इन हदीसों के ज़रिए बराबर हम से बात करते हैं। वह हमको हिदायत दे रहे हैं। वह हर मौक़े पर

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