मेयार को बुलन्द करना
الرسالہ، نومبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۲
बात का सुनने और समझने के लिए अन्ध और बहर बन रहा वह इन्सान भी कैसा बदनसीब और महरूम इन्सान है जिसके पास बोलने वाला नबी मौजूद हो लेकिन वह उसे सुनने वाला न बन सके। मुश्किल में आसानी क्या हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल नहीं दिया। और तुम्हारा वह बोझ उतार दिया जो तुम्हारी पीठ को तोड़ रहा था। और हमने तुम्हारा ज़िक्र बुलन्द किया। तो मुश्किल के साथ आसानी है, बेशक मुश्किल के साथ आसानी है। फिर जब तुम मुक्त हो जाओ तो मेहनत करो। और अपने रब की तरफ़ ध्यान लगाओ। (सूरह अल- इन्शिराह)। यह सूरह मक्का के शुरू के ज़माने में उतरी। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मक्का में जब लोगों को एकेश्वरवाद (तौहीद) की तरफ़ बुलाना शुरू किया तो यह उन तमाम लोगों को अविश्वसनीय ठहराने के बराबर था, जो अल्लाह के सिवा दूसरे खुदाओं के आधार पर बड़ाई और सरदारी का दर्जा पाए हुए थे। इसलिए ये लोग आपके सख़्त दुश्मन हो गए। वे आपको तरह-तरह की तकलीफ़ें पहुंचाने लगे। आप सख़्त परेशानी में पड़ गए। उस वक़्त इस सूरह के ज़रिए आपको अल्लाह की एक सुन्नत से बाख़बर किया गया। वह यह कि इस दुनिया में ‘मुश्किल’ का रिश्ता ‘आसानी’ से बंधा हुआ है।
‹ Previous page Next page › Contents of November 2024 All issues