जिसकी शरारत का असर उसके बाद भी रहे
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۴، صفحہ ۱۶
जाएए उनके अख़्लाक़ का ऊँचा किया जाए उनका हालत का हर लिहाज़ से ऊपर उठाने को कोशिश की जाए। इन्सान के इन्सानी में'यार को बुलन्द करना, फ़िक्री, इल्मी, अख्लाक़ी हैसियत से उसको ऊपर उठाना अहमतरीन काम है। इसमें आदमी की भलाई है और इसी में पूरे समाज की भलाई भी। यह ठीक रसूल का तरीका है यानी सुन्नते रसूल है और इसको ज़िन्दा करना सुन्नते-रसूल को ज़िन्दा करना है। कम बोलना, किसी से शिकायत न होना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एक सहाबी का इंतिक़ाल होने लगा। लोग उनके पास आए तो देखा कि उनका चेहरा चमक रहा है। लोगों ने वजह पूछी तो उन्होंने कहा, "मेरे पास मेरे आमाल में सबसे ज़्यादा भरोसे की मेरी दो आदतें हैं। एक यह कि मैं बेफ़ायदा बात नहीं करता था। दूसरे यह है कि मेरा दिल मुसलमानों के मामले में बिल्कुल साफ़ था। (जामे 'उल उलूम)
जिसकी शरारत का असर उसके बाद भी रहे
एक हकीम का कहना है कि बरकत उसके लिए है कि जब वह मरा तो
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