اختلاف ایک آزمائش
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۴
रूप से मिलती है, लेकिन उसके बाद स्वयं का एक विकसित व्यक्तित्व बनाना, यह हर इंसान का स्वयं का प्रयास होता है। ठीक उसी तरह जैसे कच्चा लोहा प्रकृति की ओर से प्रदान किया जाता है, लेकिन इस कच्चे लोहे को स्टील और मशीन में बदलने की प्रक्रिया इंसानी कारखाने में होती है। इसी आत्म-तैयारी (self-preparation) की प्रक्रिया पर अगले विकास के चरण की निर्भरता होती है। जो लोग स्वयं को पहचानें, जो लोग अपने कर्मों का ईमानदारी से मूल्यांकन करें, जो लोग अपनी कमियों को खोजकर अपने अंदर सुधार करें, जो लोग हर कीमत चुकाकर अपने "कच्चे लोहे" को "स्टील" बनाने का काम करें, जिन लोगों की यह स्थिति हो कि वे अहंकार, घमंड, लालच, जलन, गुस्सा और बदले की भावना जैसे नकारात्मक भावों का कभी शिकार न बनें, जो कि व्यक्तित्व के विकास में एक घातक बाधा की तरह होते हैं। संक्षेप में, जो लोग लगातार अपने ऊपर आत्म-शुद्धि (purification) की प्रक्रिया जारी रखें, वही लोग होते हैं जो ईश्वर की कृपा से सत्य को खोजते हैं और उसे पूरी तत्परता से स्वीकार कर लेते हैं। "तज़किया" शब्द का शाब्दिक अर्थ है, पवित्र करना (purification)। यह हर इंसान की ज़रूरी आवश्यकता है। यह हर इंसान की समस्या है कि वह अपने माहौल का असर लेता है, जिसे मानसिक जकड़न (conditioning of mind) कहा जाता है। अपनी भावनाओं और इच्छाओं के अनुसार, उसकी कुछ आदतें
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