Al-Risala · March 2025 · page 16

اختلاف ایک آزمائش

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۱۶

सच्चा शुक्र वही महसूस कर सकता है, जो अपन समय, संसाधन, और इच्छाओ को अल्लाह को राज़ी करने के लिए समर्पित करने का हौसला रखता है। यही वह कृतज्ञता है जो अल्लाह को सबसे ज़्यादा पसंद है। असल में, इस दुनिया में हर इंसान किसी न किसी रूप में यह महसूस करता है कि उसे कुछ न कुछ कम मिला है। हर किसी के दिल में कहीं न कहीं शिकायतें या नकारात्मक भावनाएँ छिपी रहती हैं। लोग अक्सर दूसरों से असंतुष्ट रहते हैं और नफरत या नाराज़गी के माहौल में जीने लगते हैं। यही वह स्थिति है, जो इंसान के लिए सच्चा शुक्र (कृतज्ञता) करना सबसे ज़्यादा मुश्किल बना देती है। कई बार इंसान ज़ुबान से "शुक्र है" कहता है, लेकिन उसके दिल में कृतज्ञता का सच्चा एहसास नहीं होता। उसका मन शिकायतों से भरा रहता है, और वह अपनी मिली नेमतों को भूल जाता है। ऐसे माहौल में सच्चा शुक्र वही इंसान कर सकता है, जो अपनी सोच को इतना जागरूक बनाए कि नकारात्मक हालात के बावजूद शुक्र करने का जज़्बा रखे। वह नफरत और शिकायतों के अंधेरे में भी उम्मीद और संतोष की रोशनी जलाए रखे। उसे चाहिए कि वह अपने दिल से शिकायतों और नकारात्मकता को एक- एक करके निकालता रहे और अंदर से सच्चे शुक्र की भावना को विकसित करे।

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